संवाददाता अमनपथ राजूनाथ जोगी नगरी : सिहावा क्षेत्र को ऋषी मुनियो का गढ माना जाता है और यह क्षेत्र धर्म आस्था का केन्द्र है इस क्षेत्र मे ऐसे कई जगह है जहा देवी देवताओ के किस्से है और इनके प्रमाण भी है जहा आज क्षेत्र वासी आस्था के साथ जाते है और अपनी मनोकामना पूरी करते है यह क्षेत्र जंगल पहाड़ से घिरा हुआ है और इन्ही जंगलो पहाडो मे आज भी देवी देवताओ ऋषि मुनियो के वास का स्थान है जो क्षेत्र वासियो का आस्था का केन्द्र है ।’= ठीक ऐसा ही लोगो का आस्था है की सोन्ढूर डैम के अंतिम छोर पहाड व घने जंगल मे एक देवी बैठ कर रो रही थी जहा कुछ देवता आये और कहने लगे देवी यहा आपको कोई नही जानता आप हमारे साथ चलो वहा आपका मान सम्मान होगा और पूजा अर्चना होगी और आप उस क्षेत्र वासियो की पीडा दूर करना उनको हर प्रकोप से बचाना जिसके बाद उसे रिसगाव के तलाब के पास लाया गया और वही उनकी पूजा पाठ होने लगी फिर ग्रामीण।वहा से कुछ दूरी पर रोसाई माता का मंदिर भी बनाये और जिस जगह देवी बैठकर रोई थी और उनके आसू जहा गिरे थे वहा आज भी पानी बहता है और आज तक उस जगह कभी पानी की कमी नही हुई भीषण गर्मी मे भी वहा से निकलने वाला पानी तलाब जैसा भरा रहा है जहा जंगल गये ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने है और आज भी उस।जगह समय समय पर ग्रामीण पूजा पाठ करते है।
ठीक ऐसा ही जिले के अंतिम छोर पर बसा रिसगाव जहा वनाचल वासियो का आस्था रिसाई माता के मंदिर से है और क्षेत्र वासी चैत्र नवरात्र के पर्व पर इस मंदिर मे आस्था के दीप जलाते है और उनकी मनोकामना पूरी होती है ग्रामीणो का मानना है की हर वर्ष यहा चैत्र नवरात्र के पर्व पर माता के मंदिर मे आस्था के दिप जलाते है जिससे इस क्षेत्र मे किसी भी प्रकार की समस्याये नही आती मा इस क्षेत्र की हर समस्या प्रकोप को दूर करती है यहा तक की यह वनाचल मे बसे होने के बावजूद भी यहा गाव मे किसी भी हिसक प्राणी का भी कोई हमला नही होता गाव मे शांति और अमन का प्रतीक है हर वर्ष अष्टमी के दिन यहा हवन होता है और उसी दिन जिस श्रद्धालू का मनोकामना होता है वो यहा पूरा करता है और आज यह क्षेत्र मे ग्रामीण हर प्रकोप से महफूज है जिसके चलते आज दिन ब दिन आस्था के दिप भी बढ रहे वही ग्रामीणो ने शासन प्रशासन से भी मांग की है की इस क्षेत्र मे सडक और पूल का निर्माण करे ताकी यह क्षेत्र आस्था के साथ विकास की ओर भी अग्रसर हो।



