मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर : जिले के केल्हारी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बिछियाटोला स्थित केवई नदी में अवैध रेत उत्खनन और नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर के निर्देश पर की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि स्वीकृत रेत खदान में नियमों के विपरीत रात्रिकाल में रेत की लोडिंग और परिवहन किया जा रहा था। जानकारी के अनुसार, खसरा क्रमांक 684, रकबा 16.250 हेक्टेयर क्षेत्र में गौण खनिज साधारण रेत खदान को विधिवत स्वीकृति दी गई थी। लेकिन हाल ही में प्रशासन को शिकायत मिली थी कि संबंधित पट्टाधारी द्वारा रात के समय भारी वाहनों के जरिए रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर तत्काल जांच टीम गठित कर मौके पर निरीक्षण कराया गया।
जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई। अधिकारियों ने पाया कि खदान संचालक पर्यावरणीय शर्तों और शासन द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर रहा था। विशेष रूप से रात्रिकालीन उत्खनन और परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित होने के बावजूद इसका खुला उल्लंघन किया जा रहा था। प्रशासन ने इस मामले को छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत उत्खनन एवं व्यवसाय (अनुसूचित क्षेत्र हेतु) नियम 2023 के तहत गंभीर अपराध मानते हुए संबंधित पट्टाधारी के खिलाफ कार्रवाई की। नियमों के उल्लंघन पर 1,00,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया, जिसे निर्धारित मद में जमा भी कराया गया है। खनिज विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और जांच अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन की सख्ती से यह स्पष्ट संकेत गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस प्रकार की अवैध गतिविधियों की जानकारी प्रशासन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित और अवैध रेत खनन से नदियों के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रतिकूल असर पड़ता है, जिससे जल स्तर में गिरावट और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। फिलहाल प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की गतिविधियां दोबारा पाए जाने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें खदान निरस्तीकरण तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।



