नई दिल्ली: ईरान के साथ जंग के बीच राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि अमेरिका बहुत मजबूत बातचीत कर रहा है और ईरान में सबसे ज्यादा सम्मानित व्यक्ति के साथ डील कर रहा है, लेकिन उन्होंने उस व्यक्ति का नाम बताने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा था, “हम कुछ ऐसे लोगों के साथ काम कर रहे हैं, जो मुझे बेहद ही समझदार और भरोसेमंद लगते हैं। अंदर के लोग जानते हैं कि वे कौन हैं? वे बेहद ही सम्मानित व्यक्ति हैं और हो सकता है कि उनमें से कोई ठीक वैसा ही हो, जिसकी हमें तलाश है।”
ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ इस्लामिक गणराज्य के समक्ष खड़ी चुनौतियों को दबाने में अपनी भूमिका को लेकर कभी भी संकोच नहीं करते रहे हैं।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है और फाइनेंशियल तथा तेल बाजारों में हेरफेर करने और उस दलदल से निकलने के लिए फेक न्यूज का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें अमेरिका और इजरायल फंसे हुए हैं।”
उन्होंने 10 मार्च को एक्स पर कहा, “निश्चित रूप से हम युद्धविराम की मांग नहीं कर रहे हैं। हमारा मानना है कि हमलावर को सजा मिलनी चाहिए और उसे ऐसा सबक सिखाया जाना चाहिए, जो उसे दोबारा ईरान पर हमला करने से रोके।”
युद्ध छिड़ने से पहले भी गालिबाफ एक प्रमुख हस्ती थे, जिन्होंने चेतावनी दी थी कि इस तरह का संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि शासन के प्रभाव-केंद्रों में उनके ऐसे संपर्क हैं, जो किसी भी बातचीत से होने वाले समझौते में उन्हें एक अहम भूमिका दिला सकते हैं।
इस्लामी गणराज्य की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित करने के बाद गालिबाफ अब शासन के एक ऐसे माहिर व्यक्ति बन गए हैं, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के प्रति अटूट रूप से वफादार हैं और उसकी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के समर्थक हैं।



