महासमुंद: संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा छत्तीसगढ़ प्रदेश समेत सम्पूर्ण राष्ट्र को केंद्र सरकार द्वारा नक्सल मुक्त बनाने के एकाधिकार श्रेय लेना निंदनीय है। देश को नक्सल मुक्त करने के सार्थक प्रयास पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय से प्रारंभ किए गए थे जो निरंतर सामूहिक प्रयासों के नतीजे है। इसमें एक सरकार का प्रयास नही कहा जा सकता। उक्त बातें प्रेस विज्ञप्ति में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग ने कही।
वरिष्ठ नेत्री श्रीमती महिलांग ने कहा कि नक्सल आतंक समस्या देश की विकट समस्याओं में से एक थी उपरोक्त।
समस्या के निवारण देश के हितों के लिए लाभदायक है, परंतु इस समस्या का निवारण अनेक वर्षों में किए गए सार्थक प्रयास है, जो पूर्व के समय के कांग्रेस गठबंधन सरकार के समय विभिन उपायों से प्रारंभ किए गए थे। पूर्व मनमोहन सिंह सरकार द्वारा पुलिस फोर्स को और अधिक मजबूत बनाना कोब्रा जैसे फोर्स का निर्माण इस समस्या के निवारणनके उपायों में से है। पर वर्तमान सरकार द्वारा स्वयं की घोषित तारीख 31 मार्च से एक दिन पूर्व संसद में नक्सल आंतक मुक्त देश की घोषणा का एकाधिकार क्रेडिट लेना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर इसे सभी सरकार के सामूहिक प्रयासों का नतीजा कहा जाता तो यह स्वागतयोग्य घोषणा कही जाती।
श्रीमती महिलांग ने आगे कहा कि पूर्व के मनमोहन सिंह सरकार की नक्सल मुक्त नीतियां सलवा जुडम अभियान सहित प्रदेश में कांग्रेस के अनेक नेताओ द्वारा के नक्सल मुक्त क्षेत्र जीरम घाटी मे लोकतंत्र को पुर्नजीवित करने के प्रयासों के चलते शहीद होने आज किसी से छिपा नही है। पर इतने सार्थक व अमूल्य प्रयासों के पश्चात नक्सल मुक्ति कांग्रेस ने श्रेय लेने की कोशिश नही की।कांग्रेस नेत्री श्रीमती महिलांग ने आगे कहा कि नक्सल वाद मुक्त की एकलौता क्रेडिट लेकर सदन में चर्चा करने वाली मोदी सरकार पहलगाँव पर आतंकी हमले की जिम्मेदारी व विफल सुरक्षा नीतियों पर इंटेलीजेंस ब्यूरो की वर्किग में कमियों की जवाबदेही पर चर्चा क्यो नही कराना चाहती। श्रीमती महिलांग ने कहा कि नक्सल मुक्त राष्ट्र होना निश्चित ही देश उत्तरोत्तर प्रगति लिए आवश्यक है लेकिन एक सरकार द्वारा श्रेय प्राप्ति व अपनी पीठ थपथपाना निंदनीय है। यह सामूहिक प्रयास का नतीजा है जिसके चलते सफलता मिली है l



