Home छत्तीसगढ़ महिला आरक्षण पर भाजपा की कथनी और करनी में फर्क: भूपेन्द्र

महिला आरक्षण पर भाजपा की कथनी और करनी में फर्क: भूपेन्द्र

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महासमुंद : महिला आरक्षण बिल पर आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र चंद्राकर सरकार पर हमला बोला है। श्री चंद्राकर ने कहा 2023 में महिला आरक्षण कानून पारित कर 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का दावा तो किया, पर इसे लागू करने की प्रक्रिया को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर जानबूझकर टाल दिया गया है। वर्तमान में जब जनगणना हुआ नहीं है तो परिसीमन कैसे हो सकता है। सरकार की मंशा साफ होती तो वर्तमान 543 लोकसभा सीटों में ही लगभग 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती थीं। जिस पर विपक्षी पार्टियां सहमत है। पर मोदी सरकार की नियत में ही खोट है। उनका आरोप है कि ऐसा करने से कई मौजूदा नेताओं की राजनीतिक स्थिति प्रभावित होती, इसलिए सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिससे सभी पक्षों को संतुष्ट रखा जा सके।

पंचायत स्तर का उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगहों पर महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिजन निर्णय लेते हैं, जिसे आम बोलचाल में “सरपंच पति” मॉडल कहा जाता है। उनके अनुसार, यही व्यवस्था बड़े स्तर पर भी लागू होने का खतरा है, जहां महिलाओं के नाम पर प्रतिनिधित्व होगा लेकिन वास्तविक नियंत्रण पुरुषों के हाथ में रहेगा। भूपेंद्र ने महिला सुरक्षा के मुद्दों का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि जमीनी स्तर पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आई है।महिला आरक्षण का घड़ियाली आंसू रोने वाली भाजपा मणिपुर में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार पर चुप्पी साधे रहती है। वहीं बिलकिस बानो के बलात्कारीयो को गुजरात की भाजपा सरकार रिहा करने का आदेश देकर उनका फूल माला से स्वागत करवाती है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों में जनसंख्या और सीटों के आधार पर होने वाले बदलाव से क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ सकता है। जनता को भावनात्मक मुद्दों में उलझाने के बजाय ठोस सुधारों की जरूरत है और महिला सशक्तिकरण को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

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