नई दिल्ली : न्याय की प्रक्रिया में सबूतों का सुरक्षित रहना अनिवार्य है, लेकिन बिहार के एक भ्रष्टाचार मामले में जो सामने आया, वह किसी फिल्म की पटकथा जैसा मालूम होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उस समय गहरा आश्चर्य व्यक्त किया, जब उसे यह जानकारी मिली कि भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपित के कब्जे से कथित तौर पर जब्त किए गए नोटों को चूहों ने कुतर कर नष्ट कर दिया है।
सुनवाई के दौरान जब हाईकोर्ट के पिछले वर्ष के फैसले का उल्लेख हुआ, तो यह तथ्य सामने आया कि जिस ‘मालखाने’ में जब्त की गई नकदी रखी गई थी, वहां की खराब स्थिति के कारण चूहों ने नोटों को बर्बाद कर दिया।
कोर्ट ने इसे केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह माना है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला की सजा को निलंबित करते हुए उसे जमानत दे दी है। यह महिला पहले ट्रायल कोर्ट से बरी हो गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे दोषी करार दिया था।
यदि भ्रष्टाचार के सबूतों का हश्र ‘चूहों का निवाला’ बनना है, तो फिर न्याय की उम्मीद किससे की जाए? यह सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के प्रति घोर उदासीनता का प्रतीक है। कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में मालखानों की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक चेतावनी की तरह है।



