रायपुर, 14 मई 2026 : छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में दशकों से पीड़ा झेल रहे सिकल सेल मरीजों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने। एक आदेश के तहत सिकल सेल संस्थान छत्तीसगढ़ को श्सेंटर ऑफ एक्सीलेंसश् के रूप में विकसित करने हेतु रु. 8 हजार 509 लाख रुपए यानी लगभग 85 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। वित्त विभाग ने भी इसके लिए अपनी सहमति दे दी है।
सिकल सेल एक गंभीर अनुवांशिक रक्त विकार है जिसमें लाल रक्त कणिकाएं असामान्य आकार की हो जाती हैं, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इस स्वीकृति के तहत संस्थान में उच्च स्तरीय आधुनिक लैब का निर्माण किया जाएगा, जिससे मरीजों को त्वरित और सटीक जांच रिपोर्ट मिल सकेगी। समय पर निदान होने से मरीजों का इलाज जल्दी शुरू हो सकेगा, जो सिकल सेल जैसी बीमारी में जीवन और मृत्यु का फर्क साबित हो सकता है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, ब्लड ट्रांसफ्यूजन सुविधा और जेनेटिक काउंसलिंग जैसी सेवाएं भी एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी का आभार प्रकट करते हुए कहा है कि यह संस्थान न केवल इलाज बल्कि रोकथाम और जागरूकता की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग से लेकर वाहक दंपतियों की काउंसलिंग तक, यह केंद्र छत्तीसगढ़ में सिकल सेल उन्मूलन अभियान को नई गति देगा।



