Home छत्तीसगढ़ सोनहत क्षेत्र में विधायक के खिलाफ सार्वजनिक बयान देना पड़ा भारी,भाजयुमो पदाधिकारी...

सोनहत क्षेत्र में विधायक के खिलाफ सार्वजनिक बयान देना पड़ा भारी,भाजयुमो पदाधिकारी को भाजपा जिला संगठन ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

0

 

 

कोरिया : भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी संगठनात्मक अनुशासन को लेकर एक बार फिर सख्ती देखने को मिली है। सोनहत क्षेत्र में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान विधायक की कार्यशैली पर सार्वजनिक मंच से सवाल उठाना भाजयुमो जिला महामंत्री मनोज साहू को भारी पड़ गया। भाजपा जिला कोरिया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मनोज साहू को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है।

भाजपा जिला अध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी द्वारा 22 मई 2026 को जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि 21 मई 2026 को सोनहत क्षेत्र के ग्राम कुशहा में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष मनोज साहू ने सार्वजनिक मंच से यह कहा था कि माननीय विधायक का सोनहत क्षेत्र में भ्रमण नहीं होता है। इस बयान को पार्टी संगठन ने अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना है। जिला संगठन का कहना है कि विधायक से जुड़ा विषय संगठनात्मक और आंतरिक चर्चा का विषय है जिसे सार्वजनिक मंच पर उठाना संगठन पदाधिकारी की मर्यादा और दायित्व के अनुरूप नहीं है। पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि इस प्रकार के बयान से संगठन की छवि प्रभावित होती है और पार्टी के भीतर असहज स्थिति निर्मित होती है।

भाजपा संगठन ने मनोज साहू को सात दिवस के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं साथ ही चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। राजनीतिक गलियारों में इस पत्र के बाद चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। माना जा रहा है कि सोनहत क्षेत्र में विधायक की सक्रियता को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच पहले से असंतोष की स्थिति बनी हुई है और उसी असंतोष का असर सार्वजनिक मंच तक पहुंच गया। हालांकि भाजपा संगठन ने स्पष्ट संकेत दे दिये हैं कि पार्टी मंच और सार्वजनिक मंच पर अनुशासनहीन बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

इस कारण बताओ सूचना पत्र की प्रतिलिपि भाजपा छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव, प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय तथा भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिया को भी भेजी गई है जिससे यह मामला अब प्रदेश स्तर तक पहुंच गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला भाजपा संगठन के भीतर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। खासकर तब जब क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के बीच जनप्रतिनिधियों की सक्रियता को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here