Home छत्तीसगढ़ स्पेशल कोर्ट के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर नहीं, तीन दोषियों को...

स्पेशल कोर्ट के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर नहीं, तीन दोषियों को मिली बड़ी राहत; सजा पर लगी रोक

0

बिलासपुर :  छत्तीसगढ़ भानुप्रतापुर के तीन याचिकाकर्ताओं ने विशेष न्यायालय एट्रोसिटी द्वारा सुनाई गई सजा को निलंबित करने की मांग करते हुए अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में अर्जेंट हियरिंग के तहत मामला दायर किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सुनवाई की। जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने स्पेशल कोर्ट एट्रोसिटी द्वारा याचिकाकर्ताओं को दी गई सजा को निलंबित कर दिया है।

मामले की सुनवाई करते हुए वेकेशन कोर्ट ने तीनों याचिकाकर्ताओं को सशर्त रिहाई का आदेश दिया है। तीनों को अलग-अलग 25-25 हजार रुपये का जमानत बांड के अलावा निचली आदेश के शर्त व आदेश के अनुसार जमानतदार पेश करना होगा। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देशित किया है, शिकायतकर्ता,पीड़ित को इस अपील के लंबित होने के संबंध में नोटिस जारी करे, जो स्वयं उपस्थित हो सकता है या अपने वकील के माध्यम से या संबंधित डीएलएसए की सहायता से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हो सकता है।

पढ़िए क्या है मामला?

विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989), जिला उत्तर बस्तर कांकेर ने विशेष आपराधिक (अत्याचार अधिनियम) में 10 अप्रैल 2026 को पारित दोषसिद्धि और सजा के आदेश के माध्यम से अपीलकर्ताओं को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 294 के तहत 500 रुपये का जुर्माना सहित 1 महीने का कठोर कारावास, जुर्माना राशि का भुगतान न करने पर 10 दिन का अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा व भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत 1000 रुपये के जुर्माने के साथ 3 महीने का कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। दोनों सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया था।

स्पेशल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में दी चुनौती

मुस्कान मोटवानी पत्नी सूरज मोटवानी,अनिल वाधवानी पुत्र राजकुमार वाधवानी,सरन यादव पिता परसराम यादव भानुप्रतापुर निवासी ने अपने अधिवक्ता विकास पटेल के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर स्पेशल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सजा को निलंबित करने की मांग की थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता विकास पटेल ने कोर्ट को बताया, मुकदमे की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता जमानत पर थे और उन्हें अधिकतम 3 महीने की सजा सुनाई गई है। याचिकार्ताओं के वकील ने यह भी कहा कि उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है ताकि वे अपील कर सकें। अपीलकर्ताओं ने अपनी सजा पूरी कर ली है। अपील की अंतिम सुनवाई में कुछ समय लग सकता है। प्रथम दृष्टया उनके पक्ष में मजबूत मामला है और उनके सफल होने की संभावना है। इसलिए, अपीलकर्ताओं को दी गई मूल कारावास की सजा को निलंबित किया जाना चाहिए।

राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सुप्रिया उपासने ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता द्वारा दिए गए तर्कों का विरोध किया और विशेष अदालत द्वारा 10 अप्रैल 2026 को पारित निर्णय का समर्थन किया।

कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा लगाई गई मूल सजा को किया निलंबित

याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, अपीलकर्ताओं को दी गई कम सजा, मुकदमे की सुनवाई के दौरान उनकी जमानत और अपील में लगने वाले संभावित समय को ध्यान में रखते हुए, अपीलकर्ताओं पर लगाई गई मूल कारावास की सजा को निलंबित करने का यह एक उपयुक्त मामला है। तदनुसार, अपील स्वीकार की जाती है और निचली अदालत द्वारा अपीलकर्ताओं पर लगाई गई मूल कारावास की सजा निलंबित की जाती है।

जमानतदार के साथ भरना होगा बांड,8 जुलाई को रजिस्ट्री के सामने होना होगा उपस्थित

कोर्ट ने अपीलकर्ताओं को 25,000 रुपये के जमानत बांड और इतनी ही राशि के एक जमानत के साथ संबंधित निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 8 जुलाई 2026 बुधवार को इस न्यायालय की रजिस्ट्री के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया हे। इसके बाद वे इस न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा दी गई तिथि पर संबंधित निचली अदालत के समक्ष उपस्थित होंगे और इस अपील के अंतिम निपटारे तक उक्त न्यायालय द्वारा दी गई सभी बाद की तिथियों पर, कम से कम 6 महीने के अंतराल पर, उपस्थित होते रहेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here