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भारत से नेपाल जाने वाले आमों पर लगा बैन!कीटनाशकों की अधिकता बनी बड़ी वजह…

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गर्मियों के इस सीजन में अगर आप नेपाल में हैं और भारतीय आमों के स्वाद का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो आपको बड़ा झटका लग सकता है. नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले आमों के आयात को अस्थाई रूप से प्रतिबंधित (Restrict) कर दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय आमों में अत्यधिक कीटनाशकों (Excessive Pesticides) की मौजूदगी की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है.

नेपाल के किसानों की लगी लॉटरी:- नेपाल सरकार के इस फैसले का वहां के स्थानीय किसानों ने स्वागत किया है. मधेस प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि और सहकारी मंत्रालय के सूचना अधिकारी अजय ग्यावली ने बताया “भारत से आने वाले फलों पर रोक लगने से स्थानीय किसानों को इस सीजन में भारतीय फलों से कॉम्पिटिशन (प्रतिस्पर्धा) नहीं करना पड़ रहा है. इससे नेपाल के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिला है, जो कि एक सकारात्मक संकेत है. “नेपाल के मधेस प्रांत में स्थित सिराहा, सप्तरी और धनुषा जिले आम के सबसे बड़े उत्पादक हैं. लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि नेपाल में आम का सीजन केवल दो महीने (मध्य-मई से मध्य-जुलाई) ही रहता है. ऐसे में घरेलू उत्पादन पूरे देश की सालाना मांग को पूरा करने के लिए काफी नहीं है.

आम और केले के दाम पहुंचे आसमान पर:- इस प्रतिबंध का सीधा असर अब नेपाल के आम उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है. मांग और सप्लाई का संतुलन बिगड़ने से फलों के दाम बेकाबू हो रहे हैं. वर्तमान में काठमांडू में आम की कीमत 100 से 150 नेपाली रुपया (NPR) प्रति किलो चल रही है. व्यापारियों का कहना है कि अगर भारत से बैन जल्द नहीं हटा, तो ये दाम बहुत ऊपर चले जाएंगे. आम के साथ-साथ भारत से केले के आयात पर भी रोक लगी हुई है. इसके चलते जो केला पिछले साल तक 120-150 नेपाली रुपया प्रति दर्जन मिलता था, वह अब दोगुना होकर 250 से 300 नेपाली रुपया प्रति दर्जन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.

क्या है इस समस्या का असली समाधान:- व्यापारियों ने नेपाल सरकार को सलाह दी है कि भारत से आने वाले फलों पर पूरी तरह से बैन लगाना कोई समझदारी भरा फैसला नहीं है. सरकार को चाहिए कि वह सीमावर्ती क्षेत्रों (Border Areas) में अपनी क्वारंटाइन और फूड टेस्टिंग प्रणालियों को मजबूत करे. भारत से आने वाले फलों की सीमा पर ही प्रॉपर क्वालिटी टेस्टिंग (गुणवत्ता जांच) की जाए और जो फल मानकों पर खरे उतरें, उन्हें बाजार में आने दिया जाए.

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