अनुपपुर/मध्यप्रदेश –छत्तीसगढ़ का सीमावर्ती जनजातीय जिला एक बार फिर असंतोष की आग मे सुलग रहा है। जिले को पॉवर हब बनाने की कोशिशों के बीच किसानों की जमीन अधिग्रहण की अराजक प्रक्रिया जारी है। जिसमे लोगों का खुला आरोप है कि किसानों , जमीन मालिकों , क्षेत्र के पर्यावरणीय हितों की अनदेखी जमकर की जा रही है।
इससे एक बार फिर लोगों के जेहन मे मोजर बेयर पॉवर प्लांट जमीन अधिग्रहण के दौरान हुई हिंसा की याद ताजा हो गयी। अनूपपु्र जिले मे चचाई पॉवर प्लांट, हिन्दुस्तान पॉवर ( मोजर बेयर ) जैतहरी, टोरंट पॉवर ( न्यू जोन ) रक्सा , अडानी पॉवर ( वेल्सपन कम्पनी ) छतई , उमरदा ,मझगंवा ( बिजुरी ) के बाद लामाटोला कोल ब्लॉक अन्तर्गत
बसखली, लामटोला, रेउला और गढ़ी में प्रस्तावित कोयला परियोजना हेतु लगभग 1030 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के कारण किसानों मे भारी आक्रोश है। जमीन मालिक ,किसानों ,स्थानीय लोगों मे विस्थापन, मुआवजा, रोजगार, सामुदायिक कल्याण के कार्यों के साथ व्यापक पर्यावरणीय चिंताएं हैं।
यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास के सभी कार्यों के कारण एक भी किसान ,जमीन मालिक के हितों की अनदेखी ना हो। उसे जमीन के बाजार मूल्य से बढकर ,उसकी सहमति का मुआवजा दिया जाए। परिवार के लिये रोजगार सुनिश्चित हो । सामुदायिक कार्यों और पर्यावरणीय हितों का समुचित ध्यान रखा जाए।
ऐसे सभी बडे कार्यों से सदियों पुरानी बसाहट, गांव ,नदी – नालों की भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व्यवस्था मे आमूल – चूल परिवर्तन होता है । यह लोगों की अपने घर, खेत, जमीन ,बसाहट से भावनात्मक लगाव पर आघात करता है। हमारा अनूपपुर जिला एक बार फिर असंतोष, नाराजगी के कारण अराजक हिंसा का शिकार ना बने ,यह देखना शासन – प्रशासन , जनप्रतिनिधियों, जवाबदेह सच्चे पत्रकारों , समाजसेवियों की जिम्मेदारी है। मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार , पर्यावरणीय प्रभाव , सामुदायिक कल्याण के कार्यों पर ईमानदारी से कार्य होना चाहिये।



