चिलचिलाती गर्मी के बाद बारिश की बूंदें राहत तो लाती हैं, लेकिन अपने साथ बीमारियों का एक ‘गिफ्ट हैंपर’ भी लेकर आती हैं! दरअसल, इस मौसम में हवा की चिपचिपी उमस और जगह-जगह लगा पानी बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों के लिए किसी फाइव-स्टार होटल से कम नहीं होते. उन्हें पनपने का पूरा मौका मिल जाता है. यही वजह है कि जैसे ही मॉनसून दस्तक देता है, अस्पतालों में वायरल बुखार, उल्टी–दस्त (डायरिया), फूड पॉइजनिंग, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियों के मरीजों की लंबी लाइनें लग जाती हैं.इस मौसम में थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं और डायबिटीज या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए, क्योंकि इन पर ये इन्फेक्शंस सबसे पहले और सबसे तेजी से हमला करते हैं.
1.साफ पानी ही है सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
बारिश के दिनों में बाढ़ का पानी या सीवर की गंदगी अक्सर पीने के पानी की सप्लाई में मिल जाती है. इससे टाइफाइड, पीलिया और पेट के गंभीर इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
2. बासी और खुले खाने को कहें ‘ना’
गर्म और नमी वाले इस मौसम में खाने-पीने की चीजों में बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेजी से बढ़ते हैं. काफी देर का रखा हुआ खाना आपको तुरंत बीमार कर सकता है.
3.मच्छरों को न बनने दें अपना मेहमान
अक्सर लोग सोचते हैं कि डेंगू-मलेरिया के मच्छर सिर्फ गंदे नाले या कीचड़ में पनपते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. डेंगू का मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में भी अंडे दे देता है.
4.’खुद डॉक्टर’ बनने की भूल न करें-
कई लोग बुखार, दस्त या बदन दर्द होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाय घर में रखी कोई भी एंटाबायोटिक या पेनकिलर खा लेते हैं. यह आदत इस मौसम में जानलेवा साबित हो सकती है.
बदलें ये आदत
1. हमेशा फिल्टर किया हुआ, उबला हुआ या सही तरीके से प्यूरिफाइड पानी ही पिएं. अगर आप बाहर जा रहे हैं, तो घर से पानी साथ लेकर निकलें. बाहर मिलने वाली बर्फ (Ice cubes) से भी बचें, क्योंकि वे अक्सर गंदे पानी से बनी होती हैं. शरीर को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है, लेकिन पानी साफ होना उससे भी ज्यादा जरूरी है.
2. सड़क किनारे मिलने वाले खुले चाट-पकोड़े, पहले से कटे हुए फल और कच्चे सलाद खाने का चस्का इस मौसम में छोड़ना ही समझदारी है. हमेशा ताजा बना हुआ गरमा-गरम खाना खाएं. अगर खाना बनाकर कई घंटे बीत चुके हैं, तो उसे बिना गर्म किए न खाएं. शुगर, किडनी के मरीजों और कमजोर इम्यूनिटी वालों को तो इस मामले में एक्स्ट्रा सावधान रहना चाहिए.
3. घर के गमलों, कूलरों, छतों पर पड़े पुराने बर्तनों, बोतलों या बाल्टियों में पानी जमा होने की आदत को तुरंत बदलें. हर हफ्ते इन्हें खाली और साफ करें. रात को सोते समय मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और बाहर जाते समय पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें. अगर बुखार के साथ बदन टूटे या तेज सिरदर्द हो, तो उसे मामूली वायरल न समझें.
4.बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवाइयां (Self-medication) खाना आज ही से बंद करें. अगर लगातार तेज बुखार हो, बार-बार उल्टियां आ रही हों, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) महसूस हो, पेशाब कम आए, सांस फूले या पेट में तेज दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. सही समय पर सही इलाज ही आपको गंभीर खतरों से बचा सकता है.



