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डेंगू से बचाव की नई उम्मीद! भारत में पहली वैक्सीन मंजूर, लेकिन क्या इससे मिलेगा 100% बचाव?

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भारत में हर साल हजारों की संख्या में लोग डेंगू से पीड़ित होते हैं। मानसून में सबसे ज्यादा खतरनाक बीमारी डेंगू बुखार को ही माना जाता है। लेकिन अब भारत ने डेंगू की रोकथाम के लिए पहली वैक्सीन, क्यूडेन्गा के साथ डेंगू से लड़ाई में एक कदम आगे बढ़ाया है। अब डेंगू से बचने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जो इस बीमारी से लड़ने में उम्मीद की एक नई किरण है।

हालांकि डेंगू का टीका लगने से डेंगू होने का खतरा कितना कम होता है ये अभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है। डॉक्टर्स की मानें तो डेंगू का टीका मच्छर नियंत्रण और समय पर उपचार का विकल्प नहीं हो सकता। आइये वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर नीतू जैन (क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग, पीएसआरआई अस्पताल, पल्मोनरी विभाग, नई दिल्ली) से जानते हैं डेंगू के वैक्सीन के फायदे और नुकसान क्या है? डेंगू का टीका किसे लगवाना चाहिए?

QDENGA क्या है और यह कैसे काम करता है?

QDENGA को डेंगू वायरस के चारों प्रकारों से सुरक्षा देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि डेंगू के एक प्रकार से ठीक होने से अन्य तीन प्रकारों से पूर्ण सुरक्षा नहीं मिलती है, इसका मतलब है कि व्यक्ति को एक से अधिक बार डेंगू हो सकता है। यह टीका दो खुराकों में दिया जाता है, आमतौर पर तीन महीने के अंतर पर दूसरी डोज दी जाती है। डॉक्टर जैन का कहना है कि सुरक्षा के लिए आपको टीके की दोनों डोज समय पर लेना जरूरी है।

क्या टीका डेंगू से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है?

डॉक्टर जैन ने बताया कि टीका डेंगू से 100 प्रतिशत सुरक्षा प्रदान नहीं करता है। टीका लगवाने के बाद भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है, हालांकि गंभीर डेंगू होने की संभावना कम हो सकती है। इसका मतलब है कि टीकाकरण के बाद भी डेंगू से बचने के उपाय अपनाए जाने जरूरी हैं।

डेंगू से बचने के लिए क्या उपाय करें

  • कूलर, गमलों, टायरों और कंटेनरों में पानी जमा होने से रोकें।
  • मच्छर भगाने वाले पदार्थों का प्रयोग करें।
  • पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
  • मच्छरों को घर में आने से रोकने के लिए दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगाएं।

क्या टीका से डेंगू का इलाज हो सकता है?

यह टीका केवल डेंगू की रोकथाम के लिए है और डेंगू से पीड़ित व्यक्ति का इलाज नहीं कर सकता। अगर आपको तेज बुखार, गंभीर बदन दर्द, उल्टी, पेट दर्द, रक्तस्राव, असामान्य कमजोरी, सांस लेने में कठिनाई या बहुत नींद आने जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। टीका लगवाने के बाद भी इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

क्या सभी को डेंगू का टीका लगवाना चाहिए?

डॉक्टर जैन बताते हैं कि सरकार और स्वास्थ्य अधिकारी डेंगू के बढ़ते मामलों, स्थानीय संक्रमण, टीके की उपलब्धता और सुरक्षा संबंधी विचारों के आधार पर यह तय करेंगे कि किस उम्र और क्षेत्रों को टीकाकरण के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए। लोगों को अपनी मर्जी से टीकाकरण कराने के बजाय, डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए ताकि वे समझ सकें कि टीका उनके लिए उपयुक्त है या नहीं।

डेंगू का टीका किसे नहीं लगवाना चाहिए?

क्योंकि क्यूडेन्गा एक जीवित टीका है, इसलिए यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है। इन लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के वैक्सीन नहीं लगवाना चाहिए।

  • प्रेग्नेंट औरत
  • स्तनपान कराने वाली माताएं
  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
  • जो लोग इम्यून सप्रेसिंग ट्रीटमेंट ले रहे हैं
  • जिन लोगों को टीकों से गंभीर एलर्जी का इतिहास हो

डेंगू की रोकथाम में टीकाकरण केवल एक हिस्सा है।

डॉक्टर जैन का कहना है कि भारत के पहले डेंगू टीके की मंजूरी एक अच्छा कदम है, लेकिन इससे पूरी तरह से सुरक्षा नहीं मिलती है। मच्छरों से बचाव ही डेंगू से बचने में सबसे असरदार और प्रभावी है।

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