Home छत्तीसगढ़ गुरु की उपासना से मिलता है ईश्वर का सानिध्य : महंत श्री...

गुरु की उपासना से मिलता है ईश्वर का सानिध्य : महंत श्री ओम नारायण द्विवेदी

0

गुरु पूर्णिमा पर श्री राम मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, गुरु वंदना, भजन-कीर्तन और विशाल भंडारे में सैकड़ों शिष्य हुए शामिल

oplus_2097184

मनेन्द्रगढ़ : गुरु पूर्णिमा पर श्री राम मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, गुरु वंदना और भजन-कीर्तन से भक्तिमय रहा वातावरण.आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर मनेन्द्रगढ़ स्थित श्री राम मंदिर में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया। मंदिर के महंत श्री ओम नारायण द्विवेदी के सैकड़ों शिष्य प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में पहुंचने लगे। पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों, गुरु वंदना, भजन-कीर्तन और सत्संग का सिलसिला चलता रहा, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।इस अवसर कई लोगों ने गुरु दीक्षा भी ली.कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण एवं हनुमान जी के पूजन-अर्चन के साथ हुई। इसके बाद शिष्यों ने अपने गुरु महंत श्री ओम नारायण द्विवेदी का पुष्पमालाओं, अंगवस्त्र एवं चरण वंदना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित विशेष गुरु आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

इस अवसर पर महंत श्री ओम नारायण द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा माना गया है। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं तथा मनुष्य को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध केवल शिक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवन को संस्कारित और समाज को सशक्त बनाने का माध्यम है। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है।
महंत श्री द्विवेदी ने उपस्थित शिष्यों से समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और संस्कारों के संरक्षण का संदेश देते हुए राष्ट्र एवं धर्म के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजन का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर भी है।

दिनभर मंदिर परिसर में भजन मंडलियों द्वारा भगवान श्रीराम एवं गुरु महिमा पर आधारित भजनों की मधुर प्रस्तुतियां दी गईं। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर भजनों का आनंद लेते रहे। गुरु वंदना और सामूहिक आरती के दौरान पूरा मंदिर “जय श्रीराम” और “गुरुदेव की जय” के उद्घोष से गूंज उठा।कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। शिष्यों ने व्यवस्था संभालते हुए श्रद्धालुओं की सेवा की। गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन श्रद्धा, सेवा और भारतीय सनातन परंपरा के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here