
महासमुंद : कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई जातिगत भेदभाव की घटना के विरोध में शुक्रवार को महासमुंद जिला कांग्रेस कमेटी ने देशव्यापी आह्वान पर उग्र विरोध प्रदर्शन और सत्याग्रह मार्च किया। कांग्रेस भवन से अंबेडकर चौक तक ‘सत्याग्रह पदयात्रा’निंदा प्रस्ताव पारित होने के बाद, महासमुंद जिला कांग्रेस के नेतृत्व में सभी नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस भवन से ‘सत्याग्रह पदयात्रा’ के रूप में सड़क पर उतरे। सत्याग्रह मार्च के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र व उत्तराखंड की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह पदयात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए स्थानीय अंबेडकर चौक पहुंची।
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बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर लिया संकल्प
अंबेडकर चौक पर एकत्रित होकर कांग्रेसियों ने भाजपा की जातिवादी मानसिकता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पश्चात, विधायक द्वारिकाधीश यादव सहित उपस्थित सभी प्रमुख पदाधिकारियों ने संविधान निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। नेताओं ने संकल्प लिया कि वे देश के संविधान और सामाजिक समरसता पर होने वाले किसी भी प्रहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इस मनुवादी सोच के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। सत्याग्रह मार्च और विरोध प्रदर्शन में पीसीसी संयुक्त महामंत्री अशोक राज आहुजा, पूर्व प्रदेश प्रभारी महामंत्री अमरजीत चावला, विधायक चातुरी नंद, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर, पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, जिला प्रभारी महामंत्री लक्ष्मण पटेल, जिला प्रभारी महामंत्री हरदेव ढिल्लों, शहर कांग्रेस अध्यक्ष गुरमीत चावला, ब्लॉक अध्यक्ष खिलावन साहू, ब्लॉक अध्यक्ष श्रीमती अन्नू चन्द्राकर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवादल के पदाधिकारी सहित भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
जिलाध्यक्ष ने द्वारिकाधीश ने रखा निंदा प्रस्ताव
कांग्रेस भवन में आयोजित विशेष बैठक में संसदीय सचिव व विधायक द्वारिकाधीश यादव द्वारा हल्द्वानी की घटना के खिलाफ एक औपचारिक निंदा प्रस्ताव लाया गया। इस प्रस्ताव में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान का गंगाजल से ‘शुद्धिकरण’ करना न सिर्फ एक व्यक्ति का, बल्कि पूरे देश के दलित समाज और बाबा साहब के संविधान का घोर अपमान है। बैठक में उपस्थित सभी वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में इस निंदा प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया।



