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पहली बार साहित्यिक क्षेत्र में प्रारंभ हुई साहित्य शिरोमणि पहल की शुरुआत

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मनेंद्रगढ़ :  साहित्य, संस्कार और राष्ट्रभक्ति के अद्भुत संगम के साथ “साहित्य शिरोमणि” कार्यक्रम का गरिमामय शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रभक्ति के भावों से हुई, जहाँ उपस्थित साहित्यकारों ने साहित्य के साथ राष्ट्रप्रेम को सर्वोच्च स्थान देते हुए देश के प्रति अपनी निष्ठा और सम्मान प्रकट किया।शिक्षक दिवस पर जिले समस्त साहित्यिक प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम साहित्य शिरोमणि का आयोजन यूनिवर्सल विद्यालय में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य

“साहित्य शिरोमणि” सम्मान समारोह के आयोजन का मूल उद्देश्य उन विशिष्ट कलमकारों और साहित्य मनीषियों को सम्मानित एवं नमन करना है, जिन्होंने केवल मनेंद्रगढ़ ही नहीं, बल्कि समूचे सरगुजा अंचल की माटी को अपनी लेखनी की बहुमूल्य कृतियों से गौरवान्वित किया है।ये वे साहित्य साधक हैं, जिन्होंने साहित्य को केवल लिखा नहीं, बल्कि साहित्य को जिया है।जिनकी कलम ने समाज की पीड़ा को स्वर दिया,जिनके विचारों ने चेतना को दिशा दी,और जिन्होंने अपने शब्दों के प्रकाश से अशिक्षा, अज्ञान और सामाजिक विसंगतियों के अंधकार को दूर कर समाज को ज्ञान और जागृति के प्रकाश-पुंज की ओर अग्रसर किया।आज हम ऐसे ही साहित्य साधकों के प्रति अपनी श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं।यह हम सभी के लिए सचमुच गौरव और सौभाग्य का क्षण है कि सरगुजा की इस पवित्र धरती पर लेखनी की विशिष्टता का सम्मान हो रहा है।साहित्य समाज की आत्मा गंगा प्रसाद मिश्रवरिष्ट साहित्यकार गंगा प्रसाद मिश्र जी ने अपने उद्वोधन में साहित्यिक गौरव के साक्षी बन रहे हैं।हमारा विश्वास है कि किसी समाज की पहचान केवल उसकी भौतिक समृद्धि से नहीं, बल्कि उसकी भाषा, संस्कृति, साहित्य और अपनी जड़ों से जुड़े साहित्यकारों के सम्मान से होती है।आज का यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है;यह लेखनी का सम्मान है, विचारों का सम्मान है, साहित्य साधना का सम्मान है और हमारी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।

साहित्य शिरोमणि सम्मान से सम्मानित हुए
वरिष्ठ साहित्यकार कहानीकार गंगा प्रसाद मिश्र, समालिया प्रसाद सराफ एवं राजेंद्र प्रसाद गुप्ता दादू भाई जिन्होंने अपनी कलम से सरगुजा आंचल में गौरवशाली साहित्यिक पृष्ठभूमि तैयार की और नवांकुरो के प्रेरणास्रोत बने
कार्यक्रम के अध्यक्ष देश के विशिष्ट साहित्यकार श्रवण उर्मलिया ने साहित्य शिरोमणि कार्यक्रम को अनुकरणीय बताया जिससे वरिष्ठ साहित्यकार कलमकारों के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण है जब परिस्थित प्रतिकूलता के कारण उनकी कलम रुकी किंतु उनके शब्द और समाज राष्ट्र के प्रति उकेरी गई रचनाएं आज भी प्रकाश पुंज की भांति साहित्य जगत प्रज्ज्वलित हैकार्यक्रम के दौरान साहित्य की विविध विधाओं और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कोरिया से पधारे गीता प्रसाद नेमा एवं अनीता सिंह ने अपनी सशक्त कविताओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। वहीं संध्या रामावत और बिनोद तिवारी ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं के माध्यम से ऐसा समां बांधा कि पूरा वातावरण साहित्यिक रस में डूब गया।प्रकृति प्रेमी सतीश द्विवेदी ने अपनी रचनाओं में जीवन के विविध रूपों और प्रकृति के सहज सौंदर्य को शब्दों में पिरोकर श्रोताओं को चिंतन के नए आयाम दिए। दूसरी ओर जगदीश पाठक के तीखे और चुटीले व्यंग्य ने साहित्यकारों के बीच हास्य की फुहार बिखेर दी और माहौल को खुशनुमा बना दिया।

‘बारिश’ और ‘मां की साड़ी’ जैसी मार्मिक एवं संवेदनशील रचनाओं के माध्यम से अनामिका चक्रवर्ती ने भावनाओं को जिस आत्मीयता से अभिव्यक्त किया, उसने कार्यक्रम को गौरवान्वित कर दिया। अनिल जैन की ‘शिखर वार्ता’ और नारायण तिवारी की कविताओं ने मानो साहित्य संगोष्ठी को जीवंत संवाद में परिवर्तित कर दिया।सतीश उपाध्याय ने अपनी प्रस्तुतियों से खूब तालियां बटोरीं। वहीं ‘आंगन में सुकून’ और जीवन के सुखद क्षणों को अभिव्यक्त करती वीरेंद्र श्रीवास्तव जी की रचना ने वातावरण में आत्मीयता और उल्लास का रंग भर दिया।साहित्यकार नीलू सिंह एवं मृत्युंजय सोनी ने साहित्य और समाज के बीच के गहरे संबंध तथा कलम की ताकत और उसकी सामाजिक महत्ता को अपने हरफनमौला अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने, संवेदनाओं को जगाने और समय की सच्चाई को आवाज देने का सशक्त माध्यम है।

इस कार्यक्रम में कविता, व्यंग्य, संवेदना, प्रकृति, समाज और जीवन के विविध रंग एक साथ दिखाई दिए। प्रत्येक रचनाकार की प्रस्तुति ने साहित्यिक संध्या को एक नई ऊंचाई प्रदान की और श्रोताओं को लंबे समय तक याद रहने वाले भावपूर्ण एवं आनंददायक क्षण दिए।कार्यक्रम में साहित्यकार नरेंद्र सिंह अरोड़ा, यूनिवर्सल विद्यालय के संस्थापक राजकुमार पाण्डेय, शैलेश जैन संतोष जैन मधु जैन मंच संचालक राजेश जैन बुंदेली उपस्थित रहे संस्था विस्तार एवं प्रबंधन को मिली नई दिशा जगदीश पाठक एवं मृत्युंजय सोनी बने संरक्षक सदस्य, शैलेश जैन को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश पाठक एवं मृत्युंजय सोनी को संस्था का संरक्षक सदस्य मनोनीत किया गया है। वहीं नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी एवं समाजसेवी शैलेश जैन को कार्यकारी अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही नेहा चक्रवर्ती को संस्था की सदस्य नियुक्त किया गया है।

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