नई दिल्ली: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की H-1B वीजा धारकों को ‘इंडेंचर्ड लेबर’ यानी बंधुआ मजदूर बताने वाली टिप्पणी पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने इस तरह की भाषा को ‘बेहद अपमानजनक’ और ‘अनुचित’ करार देते हुए कहा कि यह अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के योगदान की अनदेखी करती है। मंत्रालय के मुताबिक, ऐसी शब्दावली औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ी पीड़ादायक यादों को भी ताजा करती है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
9 अक्टूबर 2026 को जारी बयान में भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं। उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था, तकनीकी विकास और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका का विकास प्रवासियों की कई पीढ़ियों के श्रम, उद्यमशीलता और नवाचार से जुड़ा रहा है। ऐसे में भारतीय पेशेवरों के लिए बंधुआ मजदूरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना अनुचित है।
PERM कार्यक्रम के निलंबन से भी बढ़ा विवाद
यह प्रतिक्रिया अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कई कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन यानी PERM कार्यक्रम से निलंबित किए जाने की खबरों के बीच आई है। इस कार्यक्रम का संबंध अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से है।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रभावित कंपनियों में इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल जैसी भारतीय आईटी कंपनियों के साथ माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी अमेरिकी कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। इस कार्रवाई और इसके कारणों को लेकर संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि जरूरी है।
जेडी वेंस ने अमेरिकी कर्मचारियों के हितों का हवाला देते हुए इस कदम का बचाव किया। उनके बयान के अनुसार, कंपनियों को अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
भारतीय IT पेशेवरों के योगदान का दिया हवाला
विदेश मंत्रालय ने PERM कार्यक्रम से जुड़ी कार्रवाई पर भी चिंता जताई। भारत का कहना है कि इस तरह के कदम दोनों देशों की साझा आर्थिक और तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में मददगार नहीं हैं।
मंत्रालय के अनुसार, भारत अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है, ताकि भारतीय पेशेवरों की आवाजाही और भारतीय आईटी कंपनियों के कामकाज से संबंधित चिंताओं का समाधान किया जा सके।
भारत का IT क्षेत्र अमेरिकी कंपनियों की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने तथा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है।
H-1B वीजा पर क्यों अहम है यह विवाद?
H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ इस वीजा कार्यक्रम के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल रहे हैं।
ऐसे में भारतीय पेशेवरों को लेकर की गई टिप्पणी और PERM कार्यक्रम से जुड़ी कार्रवाई ने रोजगार, वेतन, आव्रजन नीति और दोनों देशों के तकनीकी सहयोग को लेकर बहस तेज कर दी है।
भारत का रुख है कि कुशल पेशेवरों की आवाजाही दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी।




