महासमुंद : सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बार-बार राजनीतिक या सरकारी आयोजनों में बुलाए जाने और सरकारी स्कूल प्रबंधन पर खासतर से कन्या स्कूलों की छात्राओं को देर शाम तक राजनीतिक आयोजनों में शामिल होने बकायदा प्रबंधन को टारगेट थमाए जाने की कड़ी निंदा करते हुए अधिवक्ता एवं मंडल अध्यक्ष शहर कांग्रेस कमेटी खिलावन बघेल ने कहा कि स्कूल बच्चों के भविष्य की नींव रखने वाले संस्थान हैं। यहीं वे ज्ञान अर्जित करते हैं, शिक्षक से संस्कार सीखते हैं और अपने सपनों को दिशा देते हैं।
इसलिए स्कूलों की पहली जिम्मेदारी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और उनके शिक्षण समय की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या सरकार का आयोजन बच्चों की शिक्षा से अधिक महत्वपूर्ण नहीं माना जाना चाहिए। विद्यार्थियों को राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन का हिस्सा बनाने के बजाय पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल, विज्ञान गतिविधियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और आधुनिक कौशल से जोड़ना अधिक जरूरी है। यदि किसी आयोजन में विद्यार्थियों की सहभागिता का स्पष्ट शैक्षणिक उद्देश्य हो, वह आयु-उपयुक्त हो और उनकी सुरक्षा, गरिमा तथा नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो, तो उसका औचित्य समझा जा सकता है। लेकिन यदि बच्चों को केवल भीड़ बढ़ाने, मंच की शोभा बढ़ाने या उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कक्षाओं से बाहर किया जाता है, तो ऐसी व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है। बच्चे किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं हैं। वे देश और प्रदेश का भविष्य हैं।




