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सांसद भोजराज नाग ने चैतन्य देवियों की झांकी का दर्शन कर, ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक संदेश की सराहना की

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अमन पथ न्यूज़ बालोद से उत्तम साहू : शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, आत्मज्ञान भवन, आमापारा, बालोद में आध्यात्म और संस्कृति का संगम देखने को मिल रहा है। यहाँ माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, माँ काली और माँ उमा के दिव्य स्वरूपों की चैतन्य झांकी सजाई गई है, जो आम मूर्तियों से अलग, जीवंत साधना और आत्मिक शक्ति का प्रतीक है।

इस चैतन्य झांकी के तीसरे दिन का उद्घाटन क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग एवं भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख के करकमलों से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी, संचालिका ब्रह्माकुमारीज बालोद द्वारा किया गया।

इस अवसर पर पवन साहू, के.सी. पवार,पूर्व जिलाध्यक्ष ,तोमन साहू जिला पंचायत उपाध्यक्ष, तोरण साहू अध्यक्ष नगर पालिका दल्ली राजहरा, दीपा साहू, तहसीलदार संध्या नामदेव सहित बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक, माताएं-बहनें और ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

पहली बार ऐसी झांकी देखकर अभिभूत हुए अतिथि

आत्मज्ञान भवन में सजी यह झांकी केवल सजावट नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक प्रयोग है। यहाँ पाँच देवियों को पाँच शक्तियों के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है – दुर्गा शक्ति के रूप में, लक्ष्मी समृद्धि और पवित्रता के रूप में, सरस्वती ज्ञान के रूप में, काली बुराई के विनाश के रूप में और उमा प्रेम और त्याग के रूप में।

झांकी के साथ-साथ वहाँ राजयोग की साधना का भी चित्रण किया गया है। पाँच घोड़ों के रूपक के माध्यम से समझाया गया है कि हमारी पाँच कर्मेन्द्रियाँ – आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा किस तरह अनियंत्रित होकर मनुष्य को भटकाती हैं। लेकिन राजयोग के अभ्यास से जब मन और बुद्धि आत्मा के नियंत्रण में आ जाती हैं, तो यही इन्द्रियाँ एक दिशा में काम करने लगती हैं और मनुष्य स्वराज्य अधिकारी बन जाता है।

अतिथियों ने कहा–

भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा कि “इस चैतन्य झांकी को देखकर हम सभी को भारत की प्राचीन परंपरा, संस्कृति और सभ्यता की गहराई का अनुभव हुआ। यह केवल दर्शन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती है। आज की युवा पीढ़ी को ऐसी जगहों पर आना चाहिए ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़ सकें।”

सांसद भोजराज नाग ने कहा कि “मैंने जीवन में कई झांकियां देखीं, लेकिन ऐसी चैतन्य झांकी पहली बार देखी है। यहाँ आकर पता चला कि मनुष्य की आत्मा को देखने की साधना कैसी होती है। मनुष्य के रूप में जन्म लेना बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात है मनुष्य होकर जीवात्मा को जानना और परमात्मा को जानना। ब्रह्माकुमारीज़ जो शिक्षा दे रही हैं, वह निःस्वार्थ और समाज को नई दिशा देने वाली है। मैं सभी नगरवासियों से आग्रह करूंगा कि वे यहाँ आकर इस ज्ञान को समझें, तभी हम अपनी प्राचीन संस्कृति को सही मायनों में समझ पाएंगे।”

बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी ने बताया कि नवरात्रि का वास्तविक अर्थ है – अपनी अंदर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करना। जब हम अपने अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार रूपी रावण को खत्म करते हैं, तभी सच्चे अर्थों में दुर्गा शक्ति हमारे अंदर जागृत होती है।चैतन्य झांकी दर्शन का समय प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक आत्मज्ञान भवन, आमापारा, बालोद में है।

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