अमन पथ ने उठाई थी आवाज तो कुंभकर्णी नींद से जागा प्रशासन, पर होश में नहीं आया – तालाब जैसे गड्ढों में मिट्टी भरकर लीपापोती
अनीता गर्ग अमन पथ ब्यूरो चीफ रायगढ़ / घरघोड़ा। अमन पथ द्वारा छाल-घरघोड़ा मार्ग की बदहाली की खबर को प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद आखिरकार शासन-प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागा जरूर, लेकिन लगता है वो अभी तक पूरे होशो-हवास में नहीं आया है।
फोटो ही चीख-चीख कर कह रही है भ्रष्टाचार की कहानी
जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ही व्हाट्सएप पर भेजी गई फोटो में साफ देखा जा सकता है कि PWD के कर्मचारी ट्रैक्टर ट्राली में कहीं से खेत की मिट्टी काटकर लाए हैं और उसी मिट्टी से तालाब जैसे गड्ढों को भर रहे हैं। उस मिट्टी में अब भी पौधों के झाड़-झंखाड़, जड़ें साफ दिखाई दे रही हैं। जहाँ नियमानुसार डामर (हॉट मिक्स), टैक कोट लगाकर पेचिंग होनी चाहिए, वहाँ खेत की मिट्टी से पेचिंग बताई जा रही है।
जनता पूछ रही है – क्या सड़क को जंगल बनाना है?
इस पर अब बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या PWD अधिकारी सड़क को सड़क नहीं रहने देना चाहते? क्या वो सड़क पर ही पौधारोपण करना चाहते हैं? या शासन की ‘एक पेड़ माँ के नाम’ योजना को दिखाने के लिए अधिकारियों को सड़क ही सबसे उचित जगह लगी है, ताकि मिट्टी में आए बीज से पौधा उग आए?
असली खेल तो अब शुरू होगा – लाखों का बिल किसकी जेब में?
सूत्रों की मानें तो इसी मिट्टी वाली पेचिंग को कागजों में डामरीकरण दिखाकर लाखों रुपये का बिल बनाया जाएगा और शासन को चुना लगाया जाएगा। अब सवाल ये है कि वो लाखों का बिल आखिर किसकी जेब में जाएगा?
राहगीरों की जान जस की तस
मिट्टी से किया गया ये पेचिंग कार्य ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं है। एक बारिश में ही ये मिट्टी बहकर पूरी अच्छी-खासी सड़क को कीचड़युक्त बना देगी, जिससे हादसों का खतरा और बढ़ जाएगा। राहगीरों की समस्या जस की तस बनी हुई है। अधिकारी खानापूर्ति कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।








