
18 मार्च 2025:- सनातन धर्म में शनि देव की आराधना का अत्यधिक महत्व है. उनका नाम सुनते ही लोग भयभीत हो जाते हैं. शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है, और उनकी पूजा विशेष रूप से शनिवार के दिन की जाती है. इस दिन भक्तजन महादेव और राम भक्त हनुमान की भी आराधना करते हैं. इसके अतिरिक्त, शनि अमावस्या पर पूजा-पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस अवसर पर गंगा स्नान का आयोजन किया जाता है, साथ ही पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है.
शनि अमावस्या पर क्या करें:- शनि अमावस्या के दिन नदी या तालाब में स्नान, दान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व है. जो लोग पितृ दोष से ग्रसित हैं, जिनकी उन्नति नहीं हो रही है या परिवार में कलह बढ़ रहा है, उनके लिए शनि अमावस्या पर पितृ की शांति के लिए पिंडदान और दान करने से परिवार में शांति बनी रहती है और पितृ प्रसन्न होते हैं, जिससे धन में वृद्धि होती है.
शनि अमावस्या कब है:- अमावस्या तिथि का आरंभ 28 मार्च 2025, शुक्रवार को रात्रि 06:43 बजे से होगा.
अमावस्या तिथि का समापन 29 मार्च 2025, शनिवार को 04:33 बजे तक होगा.
शनि के अशुभ प्रभाव को दूर करें:- यदि आप जन्मकुंडली में अशुभ ग्रहों से परेशान हैं, मासिक स्थिति ठीक नहीं है, और कार्य में मेहनत करने के बावजूद परिणाम अनुकूल नहीं मिल रहा है, तो शनि अमावस्या के दिन भगवान शनि के मंत्र का जाप करें और काले कपड़े का दान करें. 8 नंबर का चप्पल किसी गरीब व्यक्ति को दान करें, साथ ही काला तिल या काला उरद भी दान करें.
शनि अमावस्या पर करें ये उपाय
1. शनि अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस दिन दान का विशेष महत्व है.
2. इस दिन काली चींटी को आटे में चीनी मिलाकर खिलाना चाहिए, इससे आपके रुके हुए कार्य पुनः प्रारंभ हो जाते हैं.
3. शनि मंत्र का जाप करें और काले कपड़े का दान करें.
4. यदि विवाह में कोई बाधा आ रही है, तो शनि अमावस्या के दिन कौवे को चावल के भात में दूध मिलाकर खिलाने से विवाह में आ रही बाधा दूर हो जाएगी.



