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लोकतंत्र के इतिहास में काला अध्याय, नामांकन निरस्त होने पर प्रेस वार्ता में कांग्रेस का तीखा प्रहार

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अनुपपुर : मध्यप्रदेश की राजनीति में उपजे इस अभूतपूर्व संकट ने लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव को हिलाकर रख दिया है। कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना महज एक तकनीकी त्रुटि का मामला नहीं, बल्कि इसे कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर एक ‘सुनियोजित प्रहार’ करार दिया है। एक साफ-सुथरी छवि वाली नेत्री को विवादास्पद कानूनी व्याख्याओं के जाल में फंसाकर चुनावी दौड़ से बाहर करने के बाद, अब कांग्रेस ने ‘संस्थानों’ के बजाय ‘जनता की अदालत’ में आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है

कांग्रेस पार्टी ने इसे लोकतंत्र के इतिहास का ‘काला अध्याय’ बताते हुए देशव्यापी विरोध की रणनीति तैयार की है। पार्टी का स्पष्ट आरोप है कि यह कदम केवल एक प्रत्याशी को रोकने के लिए नहीं, बल्कि विपक्षी दलों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखने की एक सोची-समझी साजिश है। नामांकन निरस्त करने के आधारों पर तीखी कानूनी आपत्ति जताई है। उमरिया के पूर्व विधायक और जिला प्रभारी अजय सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जिस निजी परिवाद का हवाला दिया गया, उसमें मीनाक्षी नटराजन को ‘प्रतिवादी’ के तौर पर सूचीबद्ध किया गया था, न कि ‘अभियुक्त’ के रूप में।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इसी तरह तुच्छ और विवादित तकनीकी आधारों पर विपक्ष के उम्मीदवारों को चुनावी मैदान से बाहर किया गया, तो भविष्य में निष्पक्ष चुनाव की संभावना समाप्त हो जाएगी। क्या यह कार्रवाई निष्पक्षता को मजबूत करने के लिए थी या विपक्ष की आवाज दबाने के लिए? इस घटनाक्रम ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है कि क्या भारत का लोकतंत्र अब स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की अग्निपरीक्षा में खरा उतर पाएगा?

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