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मुर्शिदाबाद हिंसा: पिता-पुत्र के अंतिम संस्कार में नहीं आया कोई नाई और ब्राह्मण, परिवार ने ठुकराया मुआवजा

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कोलकाता :  मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में हिंसा में मारे गए पिता-पुत्र का बुधवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके स्वजनों का दावा है कि धार्मिक कर्मकांड के लिए डर से कोई नाई या ब्राह्मण नहीं आया। उन्होंने किसी तरह अपने तरीके से कर्मकांड पूरा किया।

उनका दावा है कि डर के कारण कोई भी उनके घर नहीं आना चाहता है। शमसेरगंज निवासी हरगोविंद दास और उनके बेटे चंदन दास की गत शुक्रवार को उपद्रवियों ने घर से खींचकर हत्या कर दी थी। पीड़ित परिवार ने बताया कि उनके इलाके में तीन नाई और दो ब्राह्मण हैं। परिवार के सदस्य श्राद्ध कर्म के लिए उनके पास गए थे। लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

कोई इस पचड़े में नहीं फंसना चाहता

नाइयों ने बताया कि उनके पास इस काम के लिए आवश्यक उपकरण फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा दोनों ब्राह्मणों ने कहा है कि घटना की जांच पुलिस कर रही है। इसलिए वे इस पचड़े में नहीं फंसना चाहते। परिवार वालों का दावा है कि दरअसल वे भय से आना नहीं चाहते थे, इस लिए उन्होंने इस तरह की बहानेबाजी की।

मुख्य आरोपी गिरफ्तार

पिता-पुत्र की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित इंजामुल हक को जिले के सुती से गिरफ्तार है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (दक्षिण बंगाल) सुप्रतिम सरकार ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इंजामुल के नेतृत्व में घटना को अंजाम देने के बाद आरोपितों ने सुबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी तोड़ दिए।

इसके पहले इस हत्या की घटना में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम कालू नदाब और दिलदार नदाब हैं। दोनों चचेरे भाई हैं। कालू नदाब बीरभूम के मुरारई इलाके का और दिलदार नदाब मुर्शिदाबाद के सुती का रहने वाला है।

परिवार ने ठुकराया मुआवजा

  1. पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा में मारे गए पिता-पुत्र हरगोबिंदो दास और चंदन दास के परिवार के सदस्यों ने राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे को ठुकरा दिया है।
  2. पिछले सप्ताह अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले के विभिन्न इलाकों में दंगे जैसे हालात तब पैदा हो गए थे, जब नए लागू किए गए वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे।
  3. मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज निवासी मृतक पिता-पुत्र के परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 12 अप्रैल की सुबह प्रदर्शनकारियों का एक समूह उनके घर में घुस आया।

सीएम ममता ने किया था मुआवजे का एलान

उन्होंने कथित तौर पर दोनों व्यक्तियों को उनके परिवार के सदस्यों के सामने ही मौत के घाट उतार दिया। बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वक्फ अधिनियम के प्रभाव और विरोध पर इमामों, मुअज्जिनों और मुस्लिम समुदाय के धार्मिक नेताओं के साथ एक बैठक को संबोधित करते हुए हिंसा के पीड़ितों के प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की।

हालांकि, इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा घोषणा किए जाने के एक दिन बाद दास परिवार के अन्य सदस्यों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे मुख्यमंत्री द्वारा घोषित राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे को स्वीकार नहीं करेंगे।

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