16 मई 2025:- हिन्दू धर्म में कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व है. यह दिन भगवान शिव के उग्र रूप, काल भैरव की पूजा के लिए समर्पित है. भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष प्रार्थनाएं करते हैं. माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से सभी प्रकार के भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. काल भैरव को न्याय का देवता भी माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा से भक्तों को सुरक्षा और आशीर्वाद मिलता है. यह व्रत शनि और राहु के बुरे प्रभावों को कम करने में भी सहायक माना जाता है.
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 20 मई दिन मंगलवार को सुबह 05 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 21 मई दिन बुधवार को सुबह 04 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत 20 मई दिन मंगलवार को रखा जाएगा.
कालाष्टमी का महत्व:- ऐसी मान्यता है कि काल भैरव की कृपा से लोगों को नकारात्मक ऊर्जा, बुरी आत्माओं और काले जादू आदि से छुटकारा मिलता है. उनकी आराधना करने से भक्तों के मन से हर प्रकार का डर और चिंता दूर होती है. भगवान काल भैरव को विघ्नहर्ता भी माना जाता है. उनकी पूजा करने से जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं, जिससे कार्यों में सफलता मिलती है. काल भैरव को न्याय का देवता और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है. उनकी पूजा करने से व्यक्ति को सत्य के मार्ग पर चलने और अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा मिलती है.
ऐसा माना जाता है कि काल भैरव की पूजा करने से शनि और राहु जैसे ग्रहों के बुरे प्रभावों को कम किया जा सकता है. कालाष्टमी का व्रत और भगवान काल भैरव की पूजा आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होती है. यह मन को शुद्ध करती है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने में मदद करती है. भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी कालाष्टमी का व्रत रखते हैं और भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं. माना जाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थनाएं अवश्य स्वीकार होती हैं. काल भैरव को तंत्र-मंत्र का देवता भी माना जाता है. उनकी पूजा करने से भक्तों को किसी भी प्रकार के तांत्रिक अभिचार से सुरक्षा मिलती है.



