Home छत्तीसगढ़ खदान के चालू होने से क्षेत्र वासीयों में जगी विकास की आस

खदान के चालू होने से क्षेत्र वासीयों में जगी विकास की आस

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रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : तकरीबन 21 साल पहले 2004 में अमेरा खुली खदान के अस्तित्व में आने के बाद कई उतार चढ़ाव आया मुवावजा विस्थापन नौकरी को लेकर एसईसीएल प्रबंधन और ग्रामीण आमने-सामने रहे। शासन प्रशासन की भी भूमिका सामने आई। मान-मनौव्वल का दौर भी चला। अमेरा खुली खदान से क़ोयला उत्खनन अनवरत जारी रहा। लेकिन कोयला ब्लॉक अमेरा में जब कोयला तकरीबन खत्म सा हो गया तो खदान बंद सा पड गया प्रबंधन ने बीच में कुछ साल पहले गुमगराकला के जमींदारो से भूमि अधिग्रहीत करने कोशिश की इस मुद्दे पर एसईसीएल प्रबंधन प्रशासनिक अधिकारियों तथा ग्राम वासियों के बीच बातें भी हुई लेकिन गुमगरा कला वासियों ने अपनी जमीन देने से इंकार कर दिया। अमेरा खदान का विस्तार रुक गया। इसी बीच एस ईसीएल प्रबंधन और परसोडीकला वासियों से भी जमीन अधिग्रहण को बातें हुई मुवावजे और नौकरी देने के शर्त पर ग्रामीणो ने अपने जमीन देना स्वीकार किया। प्रबंधन ने खदान विस्तार के लिए आसपास के सीमावर्ती गांवों से जमीन अधिग्रहित करने की कवायद भी शुरू किया है।

ग्राम पंचायत परसोडीकला में करीब 20 जमीन दारों को मुआवजा देकर उनके जमीनों को चिन्हांकित कर खुदाई कार्य आरंभ कर दिया है। अभी चंद दिनों पहले असंतुष्ट ग्रामीणो ने प्रबंधन द्वारा नौकरी नहीं देने की सूरत में खनन कार्य को रोक दिया यह कहते हुए कि नौकरी नहीं,तो जमीन नहीं लेकिन प्रबंधन एवं पुलिस के मान मनौव्वल के बाद ग्रामीणों ने अपनी सहमति दे दी है।एसईसीएल प्रबंधन जमीन खुदाई कार्य कर रहा है लिहाजा क्षेत्रवासियों में आशा जगी है खदान के खुल जाने से क्षेत्र के लोगों का विकास तेजी से होगा। देखने वाली बात होगी कि एस ईसी एल प्रबंधन अपने वादे पूरे कर पाती हैं या नहीं वक्त आने पर मालूम हो सकेगा।

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