
10 जून 2025:- कहा जाता है कि भगवान शिव बेहद भोले हैं. एक पात्र जल और बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं और व्यक्ति के जीवन में खुशहाली भर देते हैं. कई लोग भगवान शिव की पूजा पूरी विधि-विधान के साथ करते हैं. माना जाता है कि भगवान शिव की पूजा पंचोपचार या शोडशोपचार विधि से करें तो भगवान शिव जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
भगवान भोलेनाथ की पूजा के साथ-साथ परिक्रमा का भी नियम है लेकिन कुछ भक्त परिक्रमा में ऐसी गलती कर देते हैं, जिससे वे पुण्य की जगह पाप के भागी बन सकते हैं. भगवान शिव की पूजा, आराधना और परिक्रमा में किन गलतियों से बचना चाहिए,कुछ ही दिनों में सावन का महीना शुरू होने वाला है और सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित रहता है. इस महीने में सभी शिवालयों में शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है और सभी भक्त अपने-अपने तरीके से भगवान शिव को प्रसन्न करने में लग जाते हैं.
परिक्रमा करते वक्त रखें इन बातों का ध्यान
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि भक्त भगवान शिव की पूजा-आराधना करने के बाद शिवलिंग की परिक्रमा करते हैं. लेकिन शिवलिंग की परिक्रमा में कुछ नियमों का भी पालन करना पड़ता है, वर्ना आप पाप के भागी बन सकते हैं. कई लोग भगवान शिव के शिवलिंग की पूजा के बाद 5, 7, 11 बार परिक्रमा करते हैं लेकिन शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा अर्द्ध चंद्राकार में करनी चाहिए.
इस तरह करें परिक्रमा
यानी भक्त बाईं ओर से शुरू करें, जलहरी तक (जहां शिवलिंग से पानी निकलता है) जाएं, वहां से फिर वापस लौट जाएं यानी आधी परिक्रमा करें. जलहरी को बिल्कुल भी पार नहीं करना चाहिए. इससे भगवान शिव नाराज हो सकते हैं और आप पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. पुण्य की जगह पाप के भागी बन सकते हैं.



