
19 जून 2025:- केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार समाज के हर तबके के विकास के लिए लगातार काम रही है. पिछले 11 सालों में केंद्र की ओर से चलाए जा रहे कल्याणकारी योजनाओं की वजह से आदिवासी और जनजातीय समाज के लोगों के जीवनस्तर में खासा सुधार आया है. केंद्रीय बजट 2025-26 ने जनजातीय मामलों के मंत्रालय के लिए पर्याप्त राशि जारी की गई और जनजातीय विकास के लिए बजट में 3 गुना इजाफा किया गया.
पीएम-जनमन के लिए 24,104 करोड़ रुपये:- मोदी सरकार की ओर से आदिवासी समुदायों के समग्र विकास के लिए पर्याप्त राशि जारी की गई है, जिसमें पीएम-जनमन के लिए 24,104 करोड़ रुपये और धरती आबा अभियान (2 अक्टूबर, 2024 में शुरू) के लिए 79,156 करोड़ रुपये शामिल है. इसका मकसद जमीनी स्तर पर विकास का व्यापक मॉडल पेश करता है. इसके अलावा अनुसूचित जनजातियों के लिए विकास कार्य योजना (DAPST) में 2013-14 में जहां 24,598 करोड़ रुपये दिए गए थे वो अब 5 गुना बढ़कर 2024-25 में 1.23 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसमें 42 केंद्रीय मंत्रालय और विभाग अब एसटी-केंद्रित पहलों में योगदान दे रहे हैं. यह आदिवासी समुदायों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और आजीविका में व्यापक और निरंतर प्रगति सुनिश्चित करता है.
आंगनवाड़ी केंद्र और हॉस्टल के साथ-साथ बिजली भी:- पीएम-जनमन योजना तीन साल की अवधि में 24,104 करोड़ रुपये के बड़े निवेश के साथ, इस समुदाय के लोगों की बुनियादी सुविधाओं (आवास, पानी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पोषण, सड़क और स्थायी आजीविका) तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करके दशकों की उपेक्षा को दूर कर रहा है. इसके तहत 1,04,688 मकान बनाए गए. 7,202 गांव में पाइप के जरिए पानी पहुंचाया गया. इन इलाकों में 1,069 आंगनवाड़ी केंद्र खोले गए. इस इलाकों में 500 हॉस्टल बनाए जाने हैं जिसमें 95 हॉस्टल में काम शुरू किया गया है. साथ ही 1,05,760 घरों तक बिजली पहुंचा दी गई है. अंत्योदय के जरिए लोगों तक स्वच्छ पेयजल की पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सेवा, बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा, बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, सड़क संपर्क, डिजिटल नेटवर्क और आजीविका के बेहतर अवसर मुहैया कराना है. इसके अलावा प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम) के जरिए आदिवासी समाज के लोगों आजीविका को भी बढ़ाने की कोशिश की गई है.
हाशिये से मुख्यधारा में शामिल हुआ आदिवासी समुदाय:- सरकार ने आदिवासी आबादी के बीच हेल्थ से जुड़ी समस्याओं को दूर करने को लेकर 2023 में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन शुरू किया. इसका मकसद 2047 तक सिकल सेल एनीमिया (एससीए) को खत्म करना है और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 0-40 साल की आयु के 7 करोड़ व्यक्तियों की जांच करना है. आदिवासी समुदायों को लगातार मान्यता भी दी जा रही है. पिछले एक दशक में (2014 और 2024 के बीच) 117 समुदायों को अनुसूचित जनजातियों की लिस्ट में शामिल किया गया है, जबकि एक दशक पहले यह संख्या महज 12 थी. इस तरह इस मामले में 10 गुना की वृद्धि हुई.



