
सनातन धर्म में एकादशी तिथि का बड़ा महत्व है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत रखने से जीवन की हर परेशानी का अंत हो जाता है। सनातन धर्म में आस्था रखने वाले बहुत से लोग एकादशी तिथि का व्रत रखते हैं। हर माह में ज्यादातर 2 एकादशी तिथियां आती हैं, एक शुक्ल पक्ष की और एक कृष्ण पक्ष की। आइए जानते हैं जुलाई में ये दो एकादशी तिथियां कब-कब हैं और इनका महत्व क्या है।
1. देवशयनी एकादशी:- आषाढ़ माह में देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। इस व्रत के पुण्य प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। इसके लिए देवशयनी एकादशी का व्रत साधक अवश्य ही रखते हैं। पंचांग गणना के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 05 जुलाई को शाम 06 बजकर 58 मिनट पर होगी। वहीं, 06 जुलाई को शाम 09 बजकर 14 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त होगी। उदया तिथि गणना से 06 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी।
2. कामिका एकादशी:- सावन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन कामिका एकादशी मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, 20 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 21 जुलाई को सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी। इस साल 21 जुलाई को कामिका एकादशी मनाई जाएगी।
देवशयनी एकादशी महत्व
देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु 4 महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और शुभ मांगलिक कार्यों को करने पर रोक लग जाती है। चार माह बाद देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और फिर मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। इसलिए यह एकादशी बेहद खास मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और साथ ही अंत समय में मोक्ष प्राप्त होता है। इस दिन व्रत रखने से आरोग्य वर भगवान विष्णु आपको देते हैं।



