
नई दिल्ली : सावन के पवित्र महीने में कई लोग शिवालय में जलाभिषेक करने जा रहे हैं। ऐसे में आपने देखा होगा कि कुछ लोग पूजा के बाद शिव जी के सामने तीन बार ताली बजाते हैं। यह एक आध्यात्मिक और धार्मिक अभ्यास है, जो भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
शिवलिंग के सामने तीन बार ताली बजाना धार्मिक परंपरा है, जिसका गहरा महत्व है। पहली ताली भक्त की भगवान शिव के प्रति उपस्थिति दर्ज कराती है। दूसरी ताली मनोकामना पूर्ति और समृद्धि की प्रार्थना का प्रतीक है और तीसरी ताली क्षमा याचना और भगवान के चरणों में स्थान पाने की इच्छा व्यक्त करती है।
त्रिदेवों का आह्वानतीन ताली को बजाने के पीछे यह मान्यता भी है कि इससे ब्रह्मा, विष्णु और महेश के आह्वान होता है। तीनों देवताओं को इसके जरिये नमन किया जाता है। यह शिवजी के त्रिगुणात्मक स्वरूप यानी सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण की उपासना का प्रतीक भी हैं। ऐसा करने से इससे साधक को जल्द ही शिव की कृपा मिलती है।
वहीं, माता सीता का पता लगाने के बाद जब भगवान श्रीराम को लंका तक जाने के लिए सेतु निर्माण की जरूरत थी। तब उन्होंने रामेश्वरम में शिव पूजन के बाद भोलेनाथ के सामने तीन बार ताली बजाई थी। इसके बाद सेतु का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था।
वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि तीन बार तालियां बजाने से हाथ के एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स पर दबाव पड़ता है। इससे शरीर के विभिन्न अंगों में रक्त संचार बढ़ता है और स्वास्थ्य लाभ होता है।



