
भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं में हर क्रिया के पीछे कोई न कोई गूढ़ अर्थ छिपा होता है. मंदिरों में पूजा-अर्चना के दौरान कई ऐसे रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं, जिनमें से एक है शिवलिंग के सामने तीन बार ताली बजाना. यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं छिपी हैं. आइए जानते हैं कि शिवलिंग के सामने तीन बार ताली बजाने का क्या महत्व है और हर ताली का क्या अर्थ होता है.
पहली ताली: अपनी उपस्थिति दर्ज कराना
पहली ताली का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव को अपनी उपस्थिति का एहसास कराना है. यह एक तरह से महादेव को यह बताने का तरीका है कि “हे महादेव, मैं आपकी शरण में आया हूँ.” यह ताली भक्त के आगमन और उसकी भक्ति की शुरुआत का प्रतीक है. यह दर्शाता है कि भक्त पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पूजा के लिए उपस्थित है
दूसरी ताली: मनोकामना व्यक्त करना और कष्टों का निवारण
दूसरी ताली का संबंध भक्त द्वारा अपनी मनोकामनाओं, कष्टों, दुखों और परेशानियों को भगवान शिव के सामने व्यक्त करने से है. इस ताली को बजाकर भक्त महादेव से अपने दुखों को दूर करने और अपनी इच्छाओं को पूर्ण करने की प्रार्थना करता है. यह एक याचना का भाव है, जहां भक्त अपनी सारी समस्याएं और इच्छाएं भगवान के चरणों में अर्पित कर देता है, उनसे मार्गदर्शन और समाधान की अपेक्षा करता है.
तीसरी ताली: स्वयं को समर्पित करना और क्षमा याचना
तीसरी ताली सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह भक्त के पूर्ण समर्पण और क्षमा याचना का प्रतीक है. इस ताली के माध्यम से भक्त स्वयं को भगवान शिव को पूरी तरह समर्पित कर देता है और जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल या पाप के लिए क्षमा मांगता है. इसका अर्थ यह भी है कि भक्त अब शिवजी के दिखाए मार्ग पर चलने के लिए तैयार है और उनके चरणों में स्थान चाहता है. यह एक भक्त के रूप में भगवान के प्रति कृतज्ञता और आस्था का चरम बिंदु है.
इस परंपरा के पीछे कुछ पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं.
रावण की कथा:- एक मान्यता के अनुसार, लंकापति रावण ने जब शिव मंदिर में तीन बार ताली बजाई थी, तो उसे राजपाट का वरदान प्राप्त हुआ था. यह दर्शाता है कि सच्चे हृदय से बजाई गई तालियां और की गई प्रार्थना भगवान को प्रसन्न करती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
भगवान राम की कथा:- कहा जाता है कि जब भगवान राम लंका जाने के लिए समुद्र पर सेतु का निर्माण कर रहे थे, तब उन्होंने बालू से रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना कर पूजा की थी और उस समय उन्होंने भी तीन बार ताली बजाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी.
ताली बजाने का वैज्ञानिक महत्व:- धार्मिक महत्व के साथ-साथ, ताली बजाने का कुछ वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक महत्व भी है. ताली बजाने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और ऊर्जा का संचार होता है. यह एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करता है और मन को शांत करता है, जिससे व्यक्ति पूजा-अर्चना में और अधिक लीन हो पाता है.



