
रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : स्थानीय प्राचीन राममदिर (ठाकुर बाड़ी ) में 16 अगस्त दिन शनिवार को भगवान श्री कृष्ण का प्रकोटत्सव पूरे आस्था के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री कृष्ण के दर्शन पूजन कर अपने को धन्य किया। प्रथा
के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होने के बाद लखनपुर राजपरिवार के अमित सिंह देव ने भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप का दर्शन पूजन किया। ठाकुर बाड़ी में श्रद्धालु महिला बच्चों की अपार भीड़ लगी रही। पंडित पुजारियों ने समर्पित भाव से ड़ोल मे रखे लडुगोपाल ठाकुर जी के विधि विधान से पूजा अर्चना किये।
दर्शनार्थियों को प्रसाद वितरित की गई ।इस मौके पर दही हांडी फोड़ने प्रतिस्पर्धा का आयोजन भी हुआ। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर भजन मंडली के सदस्यों ने जमकर भजन गाये। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में महाराजा कस के कारागार में देवकी वसुदेव के आठवें संतान के रूप में भाद्रमास के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को ऱोहणी नक्षत्र में हुआ था । तब से जन्माष्टमी पर्व मनाये जाने की प्रथा आरंभ हुई।
भगवान श्री कृष्ण ने अपने अत्याचारी मामा कंस का वध किया था इसके अलावा दूसरे अनेकों लोक कल्याण कारी कार्य भी किये। जन्माष्टमी पर्व को भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिन से जोड़कर मनाये जाने की चलन प्राचीन काल से चली आ रही है।इसी प्राचीन परम्परा को कायम रखते हुए नगर लखनपुर सहित आसपास ग्रामीण इलाकों में भगवान के प्रतिमा सहित डोल रख कर आठे तिहार के नाम से जाने जाना वाला कृष्ण जन्माष्टमी उमंग के साथ मनाई गई। चारों तरफ कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की धूम रही। क्षेत्र के मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गई। नीजी घरों में भी भक्तों भगवान के पूजन किये।हाथी घोड़ा पालकी -जय कन्हैयालाल की! जयकारा से मंदिर गुंजायमान रहे। गाजे-बाजे आतिशबाजी करते जन्माष्टमी पर्व लोगों ने मनाया।आदीवासी बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने करमा नृत्य भी किया।



