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वोट चोरी के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने क्या जवाब दिया? जानें यहां

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चुनाव आयोग ने आज यानी रविवार को विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भले ही चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन चुनाव आयोग देश के हर मतदाता के साथ खड़ा है। चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। इसमें चोरी की गुंजाइश नहीं है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हमारे लिए ना कोई पक्ष है, ना ही विपक्ष बल्कि सभी समकक्ष हैं।

‘1 सितंबर तक सभी राजनीतिक दल मतदाता सूची में गलतियां बताएं’

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि 1 सितंबर तक सभी राजनीतिक दल मतदाता सूची में गलतियां बताएं, इसमें सुधार किया जाएगा। अभी भी सभी राजनीतिक दलों के पास 15 दिन का समय है, जिसमें वह मतदाता सूची में सुधार करने में अपना योगदान दे सकते हैं। 1 सितंबर के बाद इसमें बदलाव नहीं किया जाएगा।

“SIR के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा”

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “SIR के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। जिस मतदाता सूची को सभी राजनीतिक दल के बीएलओ सत्यापित करते हैं, उसी सूची में राष्ट्रीय स्तर के नेता सवाल उठाते हैं। शायद स्थानीय बीएलओ की बातें शीर्ष नेताओं तक नहीं पहुंच रही हैं। ऐसे में वोट चोरी जैसे शब्दों का प्रयोग कर संविधान का अपमान किया जा रहा है। मतदाताओं की निजता का हनन किया जा रहा है।”

“यह भारत के संविधान का अपमान नहीं तो और क्या है”

उन्होंने कहा, “कानून के अनुसार अगर समय रहते मतदाता सूचियों में त्रुटियां साझा न की जाए, अगर मतदाता की ओर से अपने उम्मीदवार को चुनने के 45 दिन के भीतर हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर नहीं की जाए और फिर वोट चोरी जैसे गलत शब्दों का इस्तेमाल कर जनता को गुमराह करने का असफल कोशिश की जाए, तो यह भारत के संविधान का अपमान नहीं तो और क्या है?” उन्होंने आगे कहा कि वोटर्स के फोटो, नाम और पहचान सार्वजनिक रूप से दिखाए गए हैं, जो उनकी निजता का उल्लंघन है।”

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