Home आस्था 14 इंच से 14 फीट का सफर… 71 साल में कितने अमीर...

14 इंच से 14 फीट का सफर… 71 साल में कितने अमीर हुए मुंबई के ‘गोल्डन गणपति’….

0

गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया… ‘मुंबई के गोल्डन गणपति’… ये नाम यूं ही नहीं पड़ा. हर साल गणेश उत्सव में भगवान गणेश की इस 14 फीट की भव्य मूर्ति को 60 किलो से ज्यादा शुद्ध सोने और 100 किलो से ज्यादा चांदी से बने आभूषणों से सजाया जाता है. हर मुंबई वासी इन्हें शहर का सबसे ‘अमीर गणपति’ कहकर बुलाते हैं. खास बात यह है कि गणेश जी का वाहक चूहा भी सोने से बना होता है. ऐसे में भगवान और उनकी सवारी का दर्शन करने के लिए मुंबई वासी किंग्स सर्कल, वडाला जरूर पहुंचते हैं. भगवान गणेश की ये मूर्ति जीएसबी सेवा गणेश पंडाल में सजती है, जो पिछले 70 साल से ‘मुंबई के गोल्डन गणपति’ को स्थापित कर रहा है.

कौन बनाता है ये मूर्ति:- आमतौर पर कई गणेश मंडल अपने मूर्तिकार बदलते रहते हैं, लेकिन जीएसबी गणेश मंडल में बप्पा की मूर्ति बनाना भी एक परंपरा है. जीएसबी की गणेश मूर्ति बनाने की कला को मूर्तिकार अविनाश पाटकर ने अपनी पिछली पीढ़ियों से सीखा है. उनका परिवार 100 साल से भी ज्यादा समय से मिट्टी की मूर्तियां बना रहा है. वैसे तो जेजे स्कूल ऑफ आर्ट जैसे प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ें अविनाश पाटकर एक सरकारी कार्यालय में डिजाइनर के रूप में काम करते हैं, लेकिन उनकी असली पहचान गणपति की मूर्तियां बनाने की उनकी कला है. वे अपनी बेटी गौतमी के साथ मिलकर हर साल इस मूर्ति को शुद्ध मिट्टी और घास से तैयार करते हैं. उनके लिए ये सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि एक तपस्या है, जो उनके परिवार की विरासत का हिस्सा है.

18 हजार से ज्यादा लोगों में बांटा जाता है ‘महाप्रसाद’:- अगर आप सोचते हैं कि जीएसबी गणेश मंडल द्वारा सिर्फ 5 दिनों का एक भव्य आयोजन है तो आप गलत हैं. ये एक ऐसा सामाजिक संस्थान है जो पूरे साल समाजसेवा के काम में लगा रहता है. गणेश उत्सव के दौरान इस मंडल के 3,500 से 3,800 रजिस्टर्ड स्वयंसेवक, इस उत्सव को सफल बनाने में दिन-रात काम करते हैं. गणेश उत्सव के दिन होने वाला ‘महाप्रसाद’ का वितरण इस पंडाल की और एक विशेषता है. यहां हर दिन हजारों भक्तों के लिए मुफ्त में भोजन तैयार किया जाता है. हर साल यहां के गणपति का दर्शन करने वाले एक भक्त के मुताबिक, हर साल इस पंडाल में 18-20 हजार से ज्यादा लोगों को दोपहर का भोजन और 5,000 से ज्यादा लोगों को सुबह का नाश्ता दिया जाता है.

सभी लोगों को महाप्रसाद का लाभ मिल जाए, इसलिए यहां हर दिन बड़े पैमाने पर भोजन तैयार किया जाता है. रसोई में लगभग 100 लोग काम करते हैं. वे रोजाना लगभग 1000-1500 किलो चावल और 1000-1300 लीटर रसम बनाते हैं, ताकि दोपहर के खाने में वो 18,000 से 20,000 लोगों को खिलाया जा सके.

पिछले साल बनाए थे कई रिकॉर्ड:- पिछला साल, यानी 2024 का गणेश उत्सव जीएसबी मंडल के लिए बेहद खास था. ये उनका 70वां श्री गणेशोत्सव समारोह था, जिसे बड़े ही शानदार और प्रभावशाली ढंग से मनाया गया. 2024 में पंडाल में 81,000 से ज्यादा पूजा और सेवाएं की गईं. इतना ही नहीं भगवान श्री महागणपति को भक्तों ने 80 किलो से भी ज्यादा चांदी अर्पित की, जिसने इस उत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया. पांचों दिन भक्तों का ऐसा जनसैलाब देखने को मिला, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया था. अपनी शोहरत के लिए मशहूर, जीएसबी सेवा मंडल, किंग्स सर्कल ने इस गणेश उत्सव के लिए 474.46 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बीमा कवर लिया है. ये रकम पिछले साल की 400 करोड़ रुपये की पॉलिसी से कहीं ज़्यादा है, जिसकी मुख्य वजह सोने और चांदी की वस्तुओं के बढ़े हुए दाम और साथ ही मंडल से जुड़े पुजारियों व स्वयंसेवकों को बीमा कवरेज में शामिल करना है.

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here