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भगवान शिव को किस जगह मिली थी ब्रह्महत्या से मुक्ति, आज कहां है वो स्थान?

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हिंदू धर्म में बद्रीनाथ धाम का विशेष महत्व है. यह धाम चार धामों में से एक माना जाता है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बद्रीनाथ धाम में स्थित ‘ब्रह्मकपाल’ नामक स्थल को बेहद पवित्र और शक्तिशाली माना गया है. मान्यता है कि यहीं पर भगवान शिव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली थी. आइए इस जगह के महत्व और इससे जुड़ी उस पौराणिक कहानी के बारे जान लेते है.

ब्रह्महत्या का पाप और शिव का दंड:- पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा के बीच श्रेष्ठता को लेकर एक विवाद हुआ. इस विवाद के दौरान, क्रोध में आकर भगवान शिव ने ब्रह्मा के पांच सिरों में से एक को काट दिया. इस कार्य के लिए उन्हें ब्रह्महत्या का घोर पाप लगा. कटे हुए सिर का हिस्सा, जिसे ‘कपाल’ कहा जाता है, भगवान शिव के हाथ से चिपक गया और उन्हें इस पाप से मुक्ति पाने के लिए कई वर्षों तक भटकना पड़ा. इस यात्रा के दौरान, वे कई पवित्र स्थानों पर गए, लेकिन वह कपाल उनके हाथ से नहीं छूटा.

बद्रीनाथ का ब्रह्मकपाल और शिव की मुक्ति:- आखिर में, जब भगवान शिव बद्रीनाथ के पवित्र धाम में पहुंचे, तो उनके हाथ से वह ब्रह्म कपाल अपने आप गिर गया. यह वही स्थान है जिसे आज ब्रह्म कपाल के नाम से जाना जाता है. इस घटना के बाद ही उन्हें ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली. तभी से यह माना जाता है कि यह स्थान इतना पवित्र है कि यहाँ किया गया कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या श्राद्ध कर्म सीधा मोक्ष की ओर ले जाता है.

पितरों का मोक्ष और ब्रह्मकपाल का महत्व:- ब्रह्मकपाल पर पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करने का विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां पिंडदान करता है, तो उन्हें जन्म और मृत्यु के चक्र से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है. इसी वजह से, देश के कोने-कोने से लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने की कामना से यहां आते हैं. कहा जाता है कि स्वयं भगवान ब्रह्मा इस स्थान पर मौजूद हैं. इसलिए, यहां पर किया गया हर श्राद्ध कर्म सीधे उनके द्वारा स्वीकार किया जाता है. इस स्थान को “पितृ दोष” निवारण का सबसे प्रभावी केंद्र भी माना जाता है. यहां श्राद्ध करने से माना जाता है कि पितृ दोष से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं और परिवार में सुख-शांति आती है.

 

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