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कब है शरद पूर्णिमा? चंद्रमा की किरणों में खीर रखने का समय क्या है? जानें इसका महत्व…

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शरद पूर्णिमा हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. शरद पूर्णिमा को आश्विन पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कोजागर पूर्णिमा के नाम से जानते हैं. हालां​कि इन सभी का अलग-अलग महत्व है. हिंदू धर्म शास्त्रों में साल की सभी 12 पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा को सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जाता है. शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में खीर को रखा जाता है. ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की बूंदें बरसती हैं. जब खीर को खुले में रखते हैं तो वे किरणें उस खीर में पड़ती हैं, जिससे वह औषधीय गुणों वाला और अमृत समान हो जाता है. उस खीर को खाने से सेहत ठीक रहती है.

शरद पूर्णिमा की तारीख:- शरद पूर्णिमा उस दिन मनाते है, जिस दिन आश्विन पू​र्णिमा तिथि में चंद्रमा उदित होता है. पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर दिन सोमवार को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर प्रारंभ हो रही है. यह तिथि अगले दिन 7 अक्टूबर मंगलवार को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर खत्म होगी. ऐसे में आश्विन पूर्णिमा का चंद्रोदय 6 अक्टूबर को होगा, इसलिए शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर सोमवार को है.

शरद पूर्णिमा पर चांद निकलने का समय:- 6 अक्टूबर सोमवार को शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय 05:27 पी एम पर है. उस दिन का चंद्रास्त 7 अक्टूबर को सुबह 06:14 बजे होगा.

शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का सही समय:- शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपने 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर उज्ज्वल चांदनी पूरी धरती पर फैलाता है. शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय शाम 05:27 बजे होगा, लेकिन उस समय चांद बस निकला ही होगा.
शरद पूर्णिमा की रात 10:37 बजे से लेकर देर रात 12:09 बजे तक लाभ-उन्नति मुहूर्त है. इस शुभ समय में आप खीर चंद्रमा की किरणों में रखें. आपके लिए यह खीर स्वास्थ्य लाभ के साथ उन्नति प्रदान करने वाला होगा.

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