इस वर्ष 5 नवंबर, बुधवार को मनाई जाने वाली देव दीपावली केवल दीपों का पर्व नहीं, बल्कि दिव्यता और भक्ति का अद्भुत संगम है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा की पवित्र तिथि पर कई शुभ योगों जैसे सिद्धि योग, शिववास योग और अश्विनी-भरणी नक्षत्र संयोग का निर्माण होगा, जो इस दिन को अत्यंत मंगलमय बनाते हैं। काशी में जब गंगा तट लाखों दीपों से जगमगाते हैं, तब आकाश में भी ग्रहों की शुभ स्थिति दैवी आभा बिखेरती है। यह समय भक्तों के लिए पुण्य-संचय, साधना और ईश्वर से एकात्मता का सर्वोत्तम अवसर होता है।
पूर्णिमा तिथि और अश्विनी- भरणी नक्षत्र का संगम
देव दीपावली के दिन पूर्णिमा तिथि शाम 6:48 बजे तक रहेगी, जो अपने आप में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन अश्विनी और भरणी नक्षत्रों का अद्भुत संगम भी बन रहा है। अश्विनी नक्षत्र जीवन में स्वास्थ्य, नई शुरुआत और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि भरणी नक्षत्र धैर्य, करुणा और सृजन का संकेत देता है। इन दोनों का मिलन शरीर और आत्मा दोनों के संतुलन को बढ़ाता है। इस शुभ संयोग में स्नान, दान, ध्यान और दीप प्रज्वलन करने से आरोग्य लाभ और मन की शांति प्राप्त होती है। यह दिन संपूर्ण रूप से पुनर्जागरण और दिव्यता का प्रतीक है।
सूर्यदेव और चंद्रदेव की स्थिति
देव दीपावली 2025 का यह दिन दैविक संयोगों से परिपूर्ण रहेगा। सूर्यदेव के तुला राशि में और चंद्रदेव के मेष राशि में स्थित होने से संतुलन, ऊर्जा और उत्साह का सुंदर मेल बन रहा है। इसके साथ ही सिद्धि योग, शिववास योग और पूर्णिमा तिथि का एक साथ आना इसे अत्यंत पवित्र बना देता है। यह वह समय है जब साधना, दीपदान और प्रार्थना का प्रत्येक क्षण फलदायी होता है। शाम के समय जब दीपक जलाए जाते हैं, तो वह केवल गंगा तट ही नहीं, बल्कि हर भक्त के अंतर्मन को भी शिव-ज्योति और भक्ति-प्रकाश से आलोकित कर देते हैं।



