Home आस्था कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान को क्यों माना जाता है सबसे पावन?...

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान को क्यों माना जाता है सबसे पावन? जानें धार्मिक महत्व…

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कार्तिक पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म में बहुत पुण्यफल देने वाला माना जाता है. इस दिन गंगा स्नान, व्रत, दान और दीपदान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यता कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ये सभी काम करने से अनंत पुण्य प्राप्त होता है. इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है. इस दिन गंगा तटों पर दीपदान करने से जीवन में प्रकाश, शांति और समृद्धि आती है.

कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 4 तारीख मंगलवार को रात में 11 बजकर 37 मिनट शुरू हो रही है. ये तिथि 5 तारीख को शाम में 6 बजकर 49 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. ऐसे में 5 तारीख को सूर्योदय के साथ पूर्णिमा तिथि व्याप्त रहने वाली है. शाम के समय भी पूर्णिमा रहेगी, इसलिए कार्तिक पूर्णिमा 5 तारीख को मनाई जाएगी. इसी दिन इसका व्रत रखा जाएगा.

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का धार्मिक महत्व:- कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान किया जाता है. इस दिन गंगा स्नान का महत्व धर्म शास्त्रों में मिलता है. इस दिन गंगा स्नान करना बहुत पुण्यदायी माना गया है. कार्तिक मास की पूर्णिमा को गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश हो जाता है. आत्मा शुद्ध हो जाती है और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर हो जाती है. यह दिन आत्मशुद्धि, मोक्ष और ईश्वरीय कृपा पाने का होता है. इस स्नान से जीवन में शुभता आती है.

भगवान विष्णु ने लिया था मत्स्य अवतार:- मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में गंगा, यमुना, गोदावरी या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के दुख दूर हो जाते हैं. इस दिन स्नान करने आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है. शांति, संतुलन और भक्ति की भावना पैदा होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु मत्स्य रूप में अवतरित हुए थे. मत्स्य अवतार विष्णु के दस प्रमुख अवतारों में पहला है. इसलिए कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और गंगा स्नान का विशेष महत्व है.

 

 

 

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