
नई दिल्ली : राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के आज 150 साल पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण के सामूहिक गायन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया।
दरअसल, भारत के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 साल पूरे हो रहे हैं। इस उपलक्ष्य पर भारत सरकार ने साल भर राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव मनाने का फैसले किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि आज का दिन बहुत ऐतिहासिक है।
पीएम मोदी ने कहा मैं देश के लाखों महापुरुषों को, मां भारती की संतानों को, ‘वंदे मातरम’ के लिए जीवन खपाने के लिए आज श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं और देशवासियों को हार्दिक बधाई देता हूं।
गुलामी के कालखंड में हुई रचनाप्रधामंत्री मोदी ने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने एक बार कहा था कि बंकिमचंद्र की ‘आनंदमठ’ सिर्फ एक उपन्यास नहीं है, यह स्वाधीन भारत का एक स्वप्न है। ‘आनंदमठ’ में ‘वंदे मातरम’ का प्रसंग, उसकी हर पंक्ति, बंकिम बाबू के हर शब्द और हर भाव, सभी के अपने गहरे निहितार्थ थे, और आज भी हैं।इस गीत की रचना गुलामी के कालखंड में हुई, लेकिन इसके शब्द कभी भी गुलामी के साए में कैद नहीं रहे। वे गुलामी की स्मृतियों से सदा आजाद रहे। इसी कारण ‘वंदे मातरम’ हर दौर में, हर काल में प्रासंगिक है। इसने अमरता को प्राप्त किया है।



