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किसानों को सरकार ने दी बड़ी राहत, गेहूं और चीनी का कर सकेंगे एक्सपोर्ट…

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भारत सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक के तौर पर भारत का यह फैसला किसानों को बेहतर दाम दिलाने और घरेलू बाजार को संतुलित रखने के उद्देश्य से लिया गया है. सरकार ने कहा कि मौजूदा स्टॉक, कीमतों और आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के बाद यह निर्णय किया गया है.

पहले भी दी जा चुकी है आंशिक अनुमति:- पिछले महीने सरकार ने 5 लाख टन गेहूं के आटे और अन्य गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी. इससे पहले नवंबर में 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी गई थी, जो 1 अक्टूबर से शुरू हुए नए सीजन के लिए थी. सरकार का मानना है कि निर्यात से किसानों को बेहतर रिटर्न मिलेगा और बाजार में संतुलन बना रहेगा.

ऊंची कीमतें बन सकती हैं चुनौती:- हालांकि व्यापारियों का कहना है कि भारतीय गेहूं की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले ज्यादा हैं. भारतीय गेहूं करीब 280 डॉलर प्रति टन (FOB) पर उपलब्ध है, जबकि अर्जेंटीना का गेहूं करीब 200 डॉलर प्रति टन में मिल रहा है. बांग्लादेश जैसे खरीदार देश बेहतर गुणवत्ता वाला गेहूं करीब 260 डॉलर प्रति टन (CFR) में खरीद रहे हैं. ऐसे में तय निर्यात लक्ष्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

रिकॉर्ड उत्पादन से बढ़ा भरोसा:- भारत ने 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे 2023 और 2024 में भीषण गर्मी के कारण बढ़ा दिया गया था. उस समय फसल को नुकसान हुआ और घरेलू कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं. हालांकि 2025 में मौसम अनुकूल रहा, बेहतर बीज और लगातार दो अच्छे मानसून के कारण उत्पादन में बड़ा सुधार हुआ. 2025 में देश ने रिकॉर्ड 11.79 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन किया. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार अच्छी फसल और पर्याप्त भंडार के कारण निर्यात का फैसला किसानों और बाजार दोनों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है.

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