
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच सरकार ने तेल रिफाइनरियों को LPG का प्रोडक्शन बढ़ाने का आदेश दिया है. सरकार ने कहा है कि वे LPG का उत्पादन ज्यादा से ज्यादा करें और सबसे पहले देश के अंदर इसकी सप्लाई सुनिश्चित करें. यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि दुनिया के ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है और सरकार चाहती है कि लोगों को खाना बनाने वाली गैस की कमी न हो. गुरुवार को जारी एक सरकारी आदेश में रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ाएं और यह गैस सिर्फ तीन सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को ही बेचें.
समुद्री रास्तों पर बढ़ गई चिंता:- यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और समुद्री रास्तों में बाधा आने की चिंता बढ़ गई है. खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल और गैस की बड़ी मात्रा दुनिया भर में भेजी जाती है, इसलिए वहां कोई भी समस्या सप्लाई को प्रभावित कर सकती है.
सरकार ने दिया ये आदेश:- सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि एलपीजी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले दो मुख्य पदार्थ प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री में इस्तेमाल करने के लिए नहीं मोड़ा जाए. इसके अलावा तीनों तेल कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि एलपीजी की सप्लाई केवल घरेलू उपभोक्ताओं को ही दी जाए. एलपीजी गैस भारत के ज्यादातर घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होती है. यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का मिश्रण होती है. सरकार का यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि अगर वैश्विक सप्लाई में कोई रुकावट आती है तो भी देश में घरों के लिए एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे.
सुरक्षित रहेगी घरेलू सप्लाई:- भारत में एलपीजी का उत्पादन बढ़ रहा है, फिर भी देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाना पड़ता है. भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60% आयात करता है. इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव या समुद्री रास्तों में बाधा आने पर देश की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी कारण रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और प्रोपेन-ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री में भेजने से रोकने का फैसला लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर घरेलू गैस की सप्लाई सुरक्षित रखी जा सके.



