नई दिल्ली : सरकार ने एक बार फिर से दोहराया है कि युद्ध की इस स्थिति में भी घरेलू स्तर पर पेट्रोल व डीजल की कोई कमी नहीं है। एलपीजी सिलिंडर को लेकर हालात सख्त जरूर हैं, लेकिन घबराने वाली बात नहीं है। सरकार ने उपभोक्ताओं से कहा है कि वे ईंधन का भंडारण न करें।
रॉयटर के अनुसार, एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने तेजी से कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि उसने संशोधित आपूर्ति आदेश के तहत पाइप से प्राकृतिक गैस कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी सिलिंडर रखने, प्राप्त करने या फिर से भरने से रोक दिया है।
सरकारी तेल कंपनियों को उन उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन या रिफिल प्रदान करने से भी प्रतिबंधित किया गया है, जिनके पास पहले से ही पीएनजी कनेक्शन हैं।
एलपीजी सिलिंडर की जगह पीएनजी पर शिफ्ट होने की अपीलकमर्शियल सिलिंडर के वितरण की जिम्मेदारी राज्य सरकार को सौंपी गई है। एलपीजी के घरेलू उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकार ने एक बार फिर से लोगों से एलपीजी सिलिंडर की जगह पीएनजी पर शिफ्ट होने की अपील की है।
अभी 33 करोड़ एलपीजी ग्राहक हैं और इनमें से 60 लाख ग्राहक तत्काल रूप से पीएनजी पर शिफ्ट हो सकते हैं। गेल इंडिया को इस काम में उपभोक्ताओं का सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
सभी पेट्रोलियम व गैस कंपनियों को इंटरनेट मीडिया व अन्य माध्यम से एलपीजी और पीएनजी को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए कहा गया है।
सिलिंडर की कालाबाजारी रोकने के लिए पुलिस सतर्कसिलिंडर की कालाबाजारी रोकने के लिए महाराष्ट्र, गोवा, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश समेत दर्जनों राज्यों में 1400 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की गई है और मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। 1300 जगहों पर औचक निरीक्षण किए गए। सभी राज्यों ने जिला स्तर पर सि¨लडर सप्लाई की निगरानी करने के लिए कमेटी बनाने का निर्देश दिया है।
सामान्य दिनों में रोजाना 50-55 लाख घरेलू गैस सिलिंडर की बुकिंग होती है। शुक्रवार को बुकिंग की संख्या लगभग 75 लाख थी, जो शनिवार को 88 लाख तक पहुंच गई। पहले 50 लाख सिलिंडर की प्रतिदिन आपूर्ति होती थी। सरकार ने इसमें बढ़ोतरी की और शनिवार को 62 लाख सिलिंडर की आपूर्ति हुई। सीएनजी की आपूर्ति पहले की तरह निर्बाध रूप से जारी है।
प्रेट्र के अनुसार, ये जहाज 92,700 टन एलपीजी ला रहे हैं और इनके 16-17 मार्च तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है। ये दोनों पोत उन 24 भारतीय जहाजों में शामिल थे, जो युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी किनारे पर फंसे हुए थे।
जागरण ब्यूरो के अनुसार, एलपीजी के छह, एलएनजी के एक और चार कच्चे तेल के जहाज अभी फारस की खाड़ी में हैं और उम्मीद की जा रही है कि इन्हें भी होर्मुज जलमार्ग से निकलने की इजाजत मिल जाएगी।
देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री से लेकर विदेश मंत्री तक ईरान, इजरायल व अमेरिका के अपने-अपने समकक्ष के साथ लगातार संपर्क में हैं। भारत तेल से लेकर गैस की खरीदारी तक के लिए खाड़ी देशों के अलावा कई अन्य देशों के संपर्क में है।
भारतीय चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जहाजरानी मंत्रालय जहाज मालिकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। मंत्रालय, विशेष रूप से जहाजरानी महानिदेशालय, जहाज मालिकों और भारतीय राजनयिक मिशनों के समन्वय से भारतीय ध्वज वाले सभी जहाजों और उन पर सवार भारतीय नाविकों से संबंधित स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहा है।
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने एक दिन पहले दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता और साझा हितों का हवाला देते हुए कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत आने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत ने विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा पर अपनी प्राथमिकताओं से अवगत कराने के लिए खाड़ी सहयोग परिषद के देशों, ईरान, अमेरिका और इजरायल सहित पश्चिम एशिया के सभी प्रमुख पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखा है।



