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ईरान में छिड़ी ‘भीतरी जंग’, राष्ट्रपति पेजेश्कियान और IRGC चीफ के बीच मतभेद गहराए, तख्तापलट के संकेत?

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रान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान और IRGC चीफ अहमद वाहिदी के बीच युद्ध को खत्म करने को लेकर मतभेद की खबर आई सामने. पेजेश्कियान को नरमपंथी माना जाता है, जबकि IRGC चीफ कट्टरपंथी विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं और अमेरिका-इजरायल को जानी दुश्मन मानते हैं.

बता दें कि यह मतभेद इस बात को लेकर हैं कि चल रहे युद्ध और उसके असर को कैसे संभाला जाए, खासकर जब इसका असर आम लोगों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.

ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने IRGC की रणनीति पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि लगातार तनाव बढ़ाने और पड़ोसी देशों पर हमले करने से देश की आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है. बताया जा रहा है कि उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही युद्ध नहीं रुका तो अगले तीन हफ्तों से एक महीने के अंदर ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह गिर सकती है. 7 मार्च को पेजेश्कियन ने एक वीडियो मैसेज में पड़ोसी देशों पर हो रहे हमलों के लिए माफी भी मांगी थी और सेना को ऐसे हमले रोकने का निर्देश दिया था, लेकिन उनके इस बयान के बाद भी हमले जारी रहे.

राष्ट्रपति पेजेश्कियन की मांग

राष्ट्रपति ने यह भी मांग की है कि प्रशासन से जुड़े फैसलों की पूरी ताकत फिर से सरकार को दी जाए, ताकि हालात को बेहतर तरीके से संभाला जा सके, लेकिन इस मांग को अहमद वाहिदी ने साफ तौर पर मानने से इनकार कर दिया. इसके जवाब में IRGC प्रमुख ने कहा कि मौजूदा हालात के लिए सरकार भी जिम्मेदार है, क्योंकि युद्ध शुरू होने से पहले जरूरी सुधार नहीं किए गए थे.

इस बीच, इजरायल के मीडिया में भी यह खबर आई है कि ईरान की सत्ता के अंदर दरारें दिखने लगी हैं. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि हालात ऐसे बन रहे हैं, जहां आगे चलकर बड़े बदलाव हो सकते हैं. युद्ध के चलते देश की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है. कई शहरों में एटीएम खाली हैं या काम नहीं कर रहे हैं. ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं भी बार-बार बंद हो रही हैं, जिससे लोगों को पैसे निकालने में दिक्कत हो रही है. सरकारी कर्मचारियों ने भी बताया है कि पिछले तीन महीनों से कई लोगों को समय पर वेतन और भत्ते नहीं मिल रहे हैं.

ईरान में युद्ध की वजह से बढ़ी महंगाई

ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही फरवरी में जरूरी सामानों की महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, जो 105% से 115% के बीच पहुंच गई थी. अब युद्ध के कारण हालात और बिगड़ गए हैं. कुल मिलाकर, ईरान में एक तरफ बाहरी युद्ध चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंदर ही अंदर सरकार और सेना के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं, जिससे स्थिति और ज्यादा जटिल होती जा रही है.

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