भगवान परशुराम जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के छठवें अवतार हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन भगवान परशुराम का अवतार हुआ था. यही कारण है कि हर साल वैशख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम भगवान की जयंती मनाई जाती है. इस दिन अक्षय तृतीया का पावन पर्व भी मनाया जाता है.परशुराम जयंती के दिन भगवान परशुराम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. हालांकि, इस साल लोगों के मन में परशुराम जयंती मनाने को लेकर संशय बना हुआ है. कुछ लोग इस साल परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाने की बात कर रहे हैं, तो कुछ 20 अप्रैल को. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर परशुराम जयंती की सही तारीख क्या है? साथ ही जानते हैं इसका पूजन मुहूर्त, विधि और महत्व.
परशुराम जयंती पूजा शुभ मुहूर्त:-परशुराम जयंती पर पूजन का समय 19 अप्रैल को शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहने वाला है. इस समय आप भगवान परशुराम का पूजन कर सकते हैं.
परशुराम जयंती का महत्व:- भगवान परशुराम ने पृथ्वी को अत्याचारी शासकों से मुक्त कराने के लिए जन्म लिया था. परशुराम ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय गुणों से युक्त थे. उनकी पूजा से ज्ञान, शक्ति और न्याय की प्रेरणा मिलती है. मान्यता है कि भगवान परशुराम आज भी पृथ्वी पर तप कर रहे हैं. इस दिन किए गए दान और शुभ कार्यों से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है
परशुराम जयंती की पूजा विधि
- परशुराम जयंती के दिन प्रात: काल स्नान करके साफ व्रत पहनें.
- भगवान परशुराम का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें. इस दिन व्रत रखने की परंपरा है.
- घर के मंदिर में या साफ स्थान पर परशुराम जी की मूर्ति या चित्र रखें.
- दीप जलाकर पूजा आरंभ करें.
- परशुराम जी के मंत्रों का जाप करें और आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पण करें.
- फल, मिठाई या नारियल का भोग लगाएं.
- दीपक जलाकर आरती करें.



