महासमुंद। क्षेत्र में अधूरी पड़ी नल-जल योजनाओं को लेकर पूर्व जनपद सदस्य एवं वर्तमान जनपद प्रतिनिधि सुधा योगेश्वर चन्द्राकर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘हर घर स्वच्छ जल’ अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी के चलते धरातल पर साकार नहीं हो पा रही है। चन्द्राकर ने आरोप लगाया कि जहां सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अरबों रुपये खर्च कर रही है,वहीं जिम्मेदार अधिकारियों की ढीली मॉनिटरिंग और ठेकेदारों की मनमर्जी से योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं।
कई स्थानों पर पानी टंकियां वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, तो कहीं पाइपलाइन का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत के कारण काम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।कमीशनखोरी और संरक्षण के चलते न सिर्फ योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधि ने मांग की है कि अधूरे कार्यों के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों को जनता के तानों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। चन्द्राकर ने सुझाव दिया कि अधूरे कार्यों को निरस्त कर पंचायतों को ही निर्माण एजेंसी बनाते हुए आवश्यक राशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण हो सके। उन्होंने शासन से मांग की है कि ग्रामीणों को जल्द से जल्द शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।



