महासमुंद। सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि भाजपा का स्थापना दिवस केवल एक राजनीतिक दल का वार्षिक उत्सव भर नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में विचारधारा, संगठन और राष्ट्रनिष्ठा की उस परंपरा का स्मरण है, जिसने समय-समय पर राजनीति को नई दिशा दी है। यह अवसर आत्ममंथन का भी है यह समझने का कि किसी भी दल की वास्तविक शक्ति उसके नेताओं या चुनावी सफलताओं में नहीं, बल्कि उसकी मूल विचारधारा में निहित होती है।
भारतीय राजनीति में विचारधारा के महत्व को यदि समझना हो, तो पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के योगदान को स्मरण करना आवश्यक है। एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे का उद्घोष केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता का स्पष्ट दृष्टिकोण था। वहीं ‘एकात्म मानववाद’ और ‘अंत्योदय’ ने यह स्थापित किया कि विकास का वास्तविक अर्थ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समृद्धि पहुंचाना है।
समय के साथ इस विचारधारा को व्यवहार में उतारने का कार्य अनेक नेताओं ने किया। अटल बिहारी वाजपेयी ने मर्यादित और समावेशी राजनीति की परंपरा को मजबूत किया, जबकि लालकृष्ण आडवाणी ने संगठन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और प्रमोद महाजन जैसे नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को वैचारिक और संरचनात्मक मजबूती प्रदान की। वर्तमान परिदृश्य में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक छवि में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का मंत्र यह संकेत देता है कि समावेशी विकास ही स्थायी प्रगति का आधार हो सकता है। वहीं अमित शाह की संगठनात्मक रणनीति ने राजनीतिक कार्यप्रणाली को नई परिभाषा दी है। क्षेत्रीय स्तर पर भी यह विचारधारा प्रभावी रूप से परिलक्षित होती है।
डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लागू जनकल्याणकारी योजनाओं ने यह सिद्ध किया कि जब नीति और नीयत स्पष्ट हो, तो विकास की धारा अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकती है। हालांकि, स्थापना दिवस जैसे अवसर केवल उपलब्धियों के उत्सव तक सीमित नहीं रहने चाहिए। यह समय है यह प्रश्न पूछने का कि क्या राजनीति आज भी विचारधारा-प्रधान बनी हुई है, या वह केवल सत्ता-प्राप्ति का माध्यम बनती जा रही है? किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि उसके राजनीतिक दल अपने मूल सिद्धांतों के प्रति कितने प्रतिबद्ध हैं



