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कब मनाई जाएगी मेष संक्रांति 14 या 15 अप्रैल जानें सही और पूजा विधि….

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हर माह में संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. यानी साल में 12 संक्रांति मनाई जाती है. संक्रांति के पर्व का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य देव से है. संक्रांति सूर्य देव के एक राशि में दूसरी राशि में प्रवेश करने पर मनाई जाती है. संक्रांति के पर्व के दिन गंगा समेत सभी पावन नदियों में स्नान-दान किया जाता है. इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.धार्मिक मान्यता है कि संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान और फिर सूर्य पूजन से आरोग्यता और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जब सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तो मेष संक्रांति का पर्व मानाया जाता है. हालांकि, इस साल लोगों के मन में ये संशय है कि मेष संक्रांति का पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा या 15 तारीख को. ऐसे में आइए जानते हैं इस पर्व की सही तारीख, पुण्य और महापुण्य काल का समय और पूजा विधि.

मेष संक्रांति कब है:-  मेष संक्रांति का पर्व इस साल 14 अप्रैल यानी कल मनाया जाएगा. सूर्य कल सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर मंगल की राशि मेष में प्रवेश करेंगे. यह मेष संक्रांति का क्षण होगा. इसी के साथ खरमास का समापन होगा. कल ही नए सौर वर्ष की शुरुआत होगी और बैसाखी भी मनाई जाएगी.

मेष संक्रांति पूजा विधि:-  मेष संक्रांति के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें. स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें. अर्घ्य देने वाले जल में लाल फूल, चावल और कुमकुम जरूर डालें. सूर्य को अर्घ्य देते समय ॐ सूर्याय नमः या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप जरूर करें. फिर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें. पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं. गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न और वस्त्र आदि का दान करें.

मेष संक्राति पुण्य और महापुण्य काल का समय

1. मेष संक्रांति का पुण्य काल सुबह 5 बजकर 57 मिनट से दोपहर को 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगा.

2. महापुण्य काल सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 11 बजकर 47 मिनट तक रहेगा.

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