हिंदू धर्म वैशाख अमावस्या का बड़ा महत्व है। यह पितरों को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया तर्पण और दान सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है, जिससे उन्हें मोक्ष मिलता है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह तिथि पितृ दोष दूर करने के लिए बहुत फलदायी मानी जा रही है, तो आइए इस तिथि से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं –
वैशाख अमावस्या पर ऐसे करें पितरों का तर्पण?
- तर्पण हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए, क्योंकि यह दिशा पितरों की मानी जाती है।
- तर्पण के जल में काले तिल, कुशा, अक्षत और सफेद फूल जरूर मिलाएं।
- कुशा को अनामिका उंगली में अंगूठी की तरह पहनें।
- जनेऊ धारण करने वाले लोग तर्पण के समय जनेऊ को दाएं कंधे पर रखें।
- तर्पण करने वाले व्यक्ति को सात्विक रहना चाहिए।
- तर्पण कभी भी सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद नहीं करना चाहिए।
- दोपहर का समय तर्पण के लिए सबसे अच्छा होता है।
- तर्पण किसी जानकार पुरोहित की मौजूदगी में ही कराना चाहिए।
- इसके बाद दान-पुण्य जरूर करें।
वैशाख अमावस्या पर ध्यान दें ये बातें
- इस दिन घर के मुख्य द्वार पर अंधेरा न रखें, शाम को दीपक जरूर जलाएं।
- इस तिथि पर मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन परिवार के किसी भी सदस्य को नहीं करना चाहिए।
- अमावस्या की रात को किसी भी सुनसान जगह या श्मशान की ओर नहीं जाना चाहिए।
पूजा मंत्र
- देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
- नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।
- ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः।।
- ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारणी धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात।।



