इस्लामाबाद में शांति वार्ता की विफलता और ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी ने ग्लोबल एनर्जी बाजार में खलबली मचा दी है. भारत अपनी जरूरत का 40% कच्चा तेल और 90% एलपीजी पश्चिम एशियाई देशों (सऊदी अरब और कतर) से आयात करता है, जिससे होर्मुज में तनाव सीधा असर डालता है. हालांकि, राहत की खबर यह है कि शांति वार्ता का एक और दौर संभावित है और डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के जल्द समाप्त होने के संकेत दिए हैं.
घरेलू बनाम कमर्शियल LPG:- सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) में 44% की भारी वृद्धि (मार्च के $542 से बढ़कर अप्रैल में $780 प्रति टन) के कारण 1 अप्रैल से कमर्शियल गैस की कीमतों में 195.50 का बड़ा उछाल आया है. इसके बावजूद, आम जनता को राहत देते हुए सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा है.
तेल कंपनियों पर दबाव:- तेल विपणन कंपनियां (OMCs) वर्तमान में घरेलू एलपीजी पर प्रति सिलेंडर 380 की अंडर-रिकवरी (घाटा) झेल रही हैं. इसके बावजूद भारत में घरेलू गैस की दरें पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में काफी कम हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय (MoPNG) ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की आपूर्ति पर्याप्त है और नागरिकों को ‘पैनिक बुकिंग’ से बचने की सलाह दी है.
डिजिटल बुकिंग में भारी उछाल:- मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अब लगभग 95% उपभोक्ता अपनी बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यमों (IVRS, WhatsApp, और ऐप्स) का उपयोग कर रहे हैं. यह डिजिटल क्रांति आपूर्ति श्रृंखला को पारदर्शी बनाने में मदद कर रही है.



