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नहर में बहते पानी को लेकर उठे सवालों पर विभाग ने दी स्पष्ट जानकारी

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जीर्णोद्धार कार्य के चलते अस्थायी व्यवस्था, पानी का बहाव बताया गया तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा

सुरेश मिनोचा कोरिया :  हाल ही में भांडी-जनकपुर नहर में बहते पानी को लेकर उठी आपत्तियों पर जल संसाधन विभाग, बैकुंठपुर के कार्यपालन अभियंता ने विस्तृत जानकारी दी है। विभाग के अनुसार यह पानी का बहाव वेस्टेज नहीं, बल्कि निर्धारित डिजाइन के अनुसार किया जा रहा सामान्य डिस्चार्ज है।

विभाग ने बताया कि एलबीसी मुख्य नहर का मेन गेट खराब होने के कारण पानी को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं है। साथ ही नहर के आरडी 6, 945 मीटर से 14, 700 मीटर तक जीर्णोद्धार कार्य जनवरी 2026 से जारी है। इस दौरान क्यूरिंग और जल प्रवाह नियंत्रित करने के उद्देश्य से अस्थायी रूप से एस्केप का निर्माण किया गया है, जिसे मरम्मत कार्य पूर्ण होने के बाद बंद कर दिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था टेल-एंड क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने, सिल्ट नियंत्रण और फ्लशिंग जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं का हिस्सा है। नहर का संचालन नियमित रूप से टैंक गेज रिपोर्ट और लॉगबुक के आधार पर किया जा रहा है। वहीं किसानों की स्थिति को लेकर विभाग ने स्पष्ट किया कि कमांड एरिया में वर्तमान में लगभग 60 प्रतिशत जल आपूर्ति सामान्य रूप से हो रही है, जबकि शेष 40 प्रतिशत आपूर्ति जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण होने के बाद सुनिश्चित की जाएगी। संबंधित पंचायतों को पहले ही रबी फसल के लिए पानी उपलब्ध नहीं होने की सूचना दी जा चुकी थी।

विभाग ने यह भी बताया कि 496.99 लाख रुपये की लागत से चल रहे इस जीर्णोद्धार कार्य में अब तक 88 लाख रुपए व्यय किए जा चुके हैं और कार्य प्रगति पर है। जिला प्रशासन और विभाग के बीच सतत समन्वय एवं मॉनिटरिंग की जा रही है।

विभाग ने जानकारी दी है कि जीर्णोद्धार पूर्ण होने के बाद सभी अस्थायी कटाव बंद कर दिए जाएंगे और यह जल बहाव अनावश्यक बर्बादी नहीं, बल्कि भविष्य में नहर के कमांड एरिया में जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कुछ समाचार पत्रों द्वारा आधी-अधूरी जानकारी प्रकाशित की है, जो तथ्य से बिल्कुल परे हैं।

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