हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. इस बार अप्रैल माह का अंतिम प्रदोष व्रत भौम प्रदोष के रूप में मनाया जाएगा. मंगलवार को आने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहते हैं, जो न केवल शिव जी बल्कि हनुमान जी का आशीर्वाद पाने और मंगल दोष से मुक्ति के लिए भी बहुत ही लाभकारी है.
भौम प्रदोष पर करें ये विशेष उपाय
कर्ज मुक्ति के लिए उपाय:- मंगलवार का प्रदोष होने के कारण इस दिन ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करना चमत्कारिक फल देता है. शाम के समय शिवलिंग पर शहद की धारा अर्पित करें और ‘ॐ ऋणमुक्तेश्वर महादेवाय नमः’ मंत्र का जाप करें.
मंगल दोष के निवारण हेतु:- जिन जातकों की कुंडली में मंगल भारी है, उन्हें इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए. महादेव को लाल मसूर की दाल अर्पित करने से भी मंगल के अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
मनोकामना पूर्ति के लिए:- शिवलिंग पर 21 बेलपत्र अर्पित करें. मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव मंदिर में दीपदान करने से जीवन के सभी अंधकार दूर होते हैं और अटके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं.
स्वास्थ्य लाभ के लिए:- बीमारियों से मुक्ति के लिए इस दिन शिवलिंग पर दूध में मिश्री और काले तिल मिलाकर अभिषेक करें. महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करना बहुत ही फलदायी होता है.
प्रदोष काल का महत्व:- शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है. माना जाता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और अपने भक्तों की पुकार सबसे जल्दी सुनते हैं.
वैशाख भौम प्रदोष व्रत 2026
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 अप्रैल 2026, शाम 06:51 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 अप्रैल 2026, शाम 07:51 बजे
- उदयातिथि और प्रदोष काल, चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के समय की जाती है, इसलिए यह व्रत 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को रखा जाएगा.



